दक्षिण कोरिया में एक विज्ञापन अभियान ने वैश्विक कॉफ़ी कंपनी Starbucks को भारी विवाद में ला दिया। देशभर में विरोध, बहिष्कार की मांग और राजनीतिक नाराज़गी के बीच कंपनी के सीईओ को इस्तीफ़ा देना पड़ा।
विवाद की जड़ बना कंपनी का नया रीयूज़ैबल टम्बलर प्रमोशन अभियान “टैंक डे”, जिसे 18 मई को लॉन्च किया गया था। लेकिन यह तारीख दक्षिण कोरिया के इतिहास में बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
18 मई 1980 को Gwangju Uprising के दौरान लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर तत्कालीन सैन्य शासन ने टैंकों और हथियारों के साथ कठोर कार्रवाई की थी। इस घटना में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी और यह आज भी देश की सामूहिक स्मृति का दर्दनाक अध्याय माना जाता है।
स्टारबक्स के अभियान में इस्तेमाल की गई टैगलाइन “मेज़ पर ‘ताक’ की आवाज़ के साथ रखें” ने भी लोगों की भावनाओं को और भड़का दिया। कई लोगों ने इसे 1987 में पुलिस हिरासत में मारे गए छात्र आंदोलनकारी की घटना से जोड़कर देखा, जब अधिकारियों ने विवादित तरीके से कहा था कि “मेज़ थपथपाने की आवाज़” से उसकी मौत हुई।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी पर ऐतिहासिक संवेदनशीलता की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मामला इतना बढ़ा कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जनता के बढ़ते दबाव के बाद कंपनी ने विवादित विज्ञापन अभियान वापस ले लिया, सार्वजनिक माफ़ी जारी की और अंततः सीईओ ने पद छोड़ दिया।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक ब्रैंड्स के लिए किसी भी देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं को समझना कितना आवश्यक है।मार्केटिंग की गलती बड़े सामाजिक विवाद का रूप ले सकती है।