नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े रणनीतिक ठिकानों पर नए सैन्य हमले शुरू करने का दावा किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में आग की ऊंची लपटें तथा धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन हमलों के दौरान एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल को भी निशाना बनाया गया। हालांकि इस संबंध में स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार इन सैन्य अभियानों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए यह कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है। यदि यहां किसी प्रकार का सैन्य संघर्ष या अवरोध उत्पन्न होता है तो उसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और व्यापार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर सैन्य गतिविधि पर पूरी दुनिया की नजर रहती है।
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि हालिया कार्रवाई किसी व्यापक युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। अमेरिका का दावा है कि उसके सैन्य अभियान का लक्ष्य उन ठिकानों को कमजोर करना है जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा कि वह अपने सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
ट्रंप के बयान के बाद फिर बढ़ा तनाव
हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले कहा था कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए जो अंतरिम समझौता हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं माना जा सकता। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई इसी प्रकार जारी रही तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।
रेलवे पुल पर हमले का दावा
सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों के दौरान एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया गया। वायरल तस्वीरों में बड़े पैमाने पर आग और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि अभी तक ईरानी प्रशासन की ओर से इस घटना पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। वहीं स्वतंत्र एजेंसियों ने भी वायरल वीडियो और तस्वीरों की पूरी तरह पुष्टि नहीं की है। ऐसे में रेलवे पुल को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
ईरान की संभावित प्रतिक्रिया
ईरान ने पहले भी स्पष्ट किया है कि यदि उसके रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया जाता है तो वह उचित समय पर जवाब देगा। हालांकि इस ताजा घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबी कार्रवाई होती है तो पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है तथा इसका असर समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर हैं। इसलिए इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर वैश्विक बाजार की नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील
कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह तनाव व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं, सैन्य रणनीति और कूटनीतिक प्रयास यह तय करेंगे कि पश्चिम एशिया का यह तनाव कम होगा या और अधिक बढ़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को देखते हुए इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान पूरी दुनिया के हित में होगा।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रारंभिक रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। रेलवे पुल को हुए नुकसान तथा अन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी अभी शेष है।)