कराकस (वेनेजुएला)। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। बीते बुधवार (24 जून) को आए दो विनाशकारी भूकंपों के बाद शनिवार को देश में एक बार फिर 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, इस ताजा भूकंप का केंद्र देश के उत्तरी तट के पास था, जिसके झटके राजधानी कराकास और माराके शहर में भी महसूस किए गए। इससे राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों और नागरिकों में दहशत फैल गई।
वहीं, बुधवार को आए जुड़वां भूकंप (Twin Earthquakes) के तीन दिन बाद मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा बढ़कर 920 हो गया है। इस आपदा में 3,360 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि 51,700 से ज्यादा लोग अब भी लापता (Missing) बताए जा रहे हैं। मलबे के नीचे बड़े पैमाने पर लोगों के दबे होने के कारण मृतकों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका है।
कई प्रभावित इलाकों में भारी मशीनरी और सरकारी राहत टीमों की भारी कमी देखी जा रही है। यही कारण है कि निराश और बेबस लोग अपने परिजनों को ढूंढने के लिए खुद ही मलबे के ढेरों को हटा रहे हैं। ला गुआइरा और कराकास के कई रिहायशी इलाकों में परिवार हथौड़ों, कुदाल और अन्य साधारण औजारों से धराशायी हुई इमारतों को खोद रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक मलबे से केवल 243 लोगों को ही जिंदा बाहर निकाला जा सका है।
| श्रेणी | स्थिति / प्रभाव |
| कुल मौतें | 920 (लगातार बढ़ने की आशंका) |
| घायलों की संख्या | 3,360 से अधिक |
| लापता लोग | 51,700 से ज्यादा |
| प्रभावित आबादी | करीब 67.6 लाख लोग (IOM के अनुसार) |
| आर्थिक नुकसान | संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार करीब $6.7 बिलियन का नुकसान |
एक सदी का सबसे शक्तिशाली भूकंप: > मौसम और भूवैज्ञानिक एजेंसियों के अनुसार, बुधवार को महज 39 सेकंड के भीतर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के बैक-टू-बैक भूकंप वेनेजुएला में पिछले 100 से अधिक वर्षों में आए सबसे शक्तिशाली भूकंप हैं। 24 जून को राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण अधिकांश लोग अपने घरों में थे, जिसके चलते तबाही का स्तर और बढ़ गया।
इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाविनाश से वेनेजुएला की करीब 67.6 लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। इसमें से करीब 20 लाख लोग अकेले राजधानी कराकास के हैं।
सैकड़ों बहुमंजिला इमारतें और रिहायशी परिसर ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, जिसके कारण लाखों लोग कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी और दूरसंचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। सरकार ने ढही हुई इमारतों में संभावित विस्फोटों को रोकने के लिए पूरे कराकास में गैस की आपूर्ति बंद कर दी है।