किन्नौर में भूस्खलन से नेशनल हाईवे बंद, अब तक 14 लोगों की मौत

शिमला: हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने भारी तबाही मचा रखी है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के कारण राज्य में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य भर में सड़क संपर्क, बिजली और पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। किन्नौर में हादसा टला शुक्रवार तड़के करीब […]

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  • July 4, 2026 8:30 am IST, Published 2 hours ago

शिमला: हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने भारी तबाही मचा रखी है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के कारण राज्य में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य भर में सड़क संपर्क, बिजली और पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

किन्नौर में हादसा टला

शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे किन्नौर जिले के चोलिंग में तेज बारिश के बाद अचानक बाढ़ आ गई। मलबे के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) का करीब 30 मीटर हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया, जिसे बहाल करने में घंटों का समय लगा। इस दौरान मलबे की चपेट में दो कारें आ गईं, गनीमत रही कि कारें वहीं रुक गईं और एक बड़ा हादसा होने से टल गया। इसके अलावा, रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी मलबे के कारण यातायात के लिए बंद हो गया है।

तीन दिन में 16 करोड़ का नुकसान

मानसून के आगमन के बाद से ही राज्य में भारी नुकसान का सिलसिला जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार:

  • आर्थिक नुकसान: मानसून के प्रवेश से अब तक लगभग 16 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

  • बारिश का आंकड़ा: पिछले तीन दिनों में राज्य में 30.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 106% अधिक है। विशेष रूप से किन्नौर में यह आंकड़ा सामान्य से 423% अधिक (18.3 मिमी) रहा है।

  • प्रभावित सेवाएं: प्रदेश भर में अभी भी 49 सड़कें और तीन बिजली ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं।

मृतकों का आंकड़ा

स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून से अब तक मौसम से जुड़ी आपदाओं में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि खराब मौसम के कारण हुई सड़क दुर्घटनाओं में दो अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रशासन और राहत टीमें युद्ध स्तर पर मलबा हटाने और आवश्यक सेवाएं बहाल करने में जुटी हुई हैं।

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