किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया, जब राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (एनएच-5) पर बना लगभग 190 फीट लंबा बेली ब्रिज अचानक टूट गया। हादसे के समय एक भारी डंपर पुल से गुजर रहा था, जो पुल के ढहते ही नीचे जा गिरा। दुर्घटना में डंपर चालक घायल हो गया, जिसे स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना किन्नौर के उरनी क्षेत्र में हुई, जहां यह बेली ब्रिज कई वर्षों से यातायात के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डंपर पुल के मध्य भाग तक पहुंचा ही था कि अचानक पुल का ढांचा हिलने लगा और कुछ ही क्षणों में पूरा पुल टूटकर नीचे गिर गया। घटना इतनी तेजी से हुई कि चालक को वाहन रोकने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए चालक को बाहर निकाला गया। अधिकारियों ने बताया कि चालक को मामूली चोटें आई हैं और उसकी हालत खतरे से बाहर है। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई ताकि कोई अन्य दुर्घटना न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल लंबे समय से भारी वाहनों का दबाव झेल रहा था। हालांकि पुल की स्थिति को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई गई थी, लेकिन नियमित यातायात जारी रहा। अब पुल टूटने के बाद इसकी मजबूती और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र में मौजूद अन्य पुलों और संरचनाओं की भी तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन की प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि पुल पर गुजर रहे वाहन का भार निर्धारित सीमा से अधिक हो सकता है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा गया है, जो पुल के टूटने के कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा संरचनात्मक कमजोरी, अत्यधिक भार या किसी अन्य कारण से हुआ।
इस दुर्घटना के बाद एनएच-5 पर यातायात प्रभावित हुआ। यह मार्ग हिमाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में शामिल है और किन्नौर को राज्य के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की है। पुलिस द्वारा वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है ताकि लोगों को अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बने अस्थायी या वैकल्पिक पुलों की समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है। मौसम की मार, भूस्खलन, भारी वाहनों की आवाजाही और प्राकृतिक परिस्थितियों का असर इन संरचनाओं पर पड़ता है। ऐसे में नियमित निरीक्षण और मरम्मत कार्य सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। किन्नौर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां सड़क संपर्क जीवनरेखा के समान माना जाता है।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। साथ ही, भारी वाहनों के चालकों को निर्धारित भार क्षमता और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर सड़क अवसंरचना की सुरक्षा और रखरखाव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। प्रशासन का कहना है कि हादसे की पूरी जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में राहत कार्य जारी है और यातायात को सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।