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श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट में अगस्त में सुनवाई

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद से जुड़े बहुचर्चित मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया गया। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। अब यह मामला 21 से 23 अगस्त के बीच […]

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  • July 5, 2026 12:30 am IST, Published 16 minutes ago

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद से जुड़े बहुचर्चित मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया गया। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। अब यह मामला 21 से 23 अगस्त के बीच सुप्रीम कोर्ट में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत में सुनवाई के लिए रखा जाएगा।

यह विवाद लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और देश के सबसे चर्चित धार्मिक एवं कानूनी मामलों में शामिल है। शनिवार को मथुरा में आयोजित विशेष लोक अदालत में न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन मुस्लिम पक्ष के उपस्थित न होने से वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।

हिंदू पक्ष ने रखा प्रस्ताव

विशेष लोक अदालत में उपस्थित हिंदू पक्ष के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव रखा कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही मस्जिद ईदगाह स्थित है, वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान की भूमि है। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष विवादित ढांचा हटाने पर सहमत होता है तो उसके बदले किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

हिंदू पक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव विवाद का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान निकालने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण इस प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।

मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति बनी बाधा

लोक अदालत की कार्यवाही के दौरान मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता संभव नहीं हो सकी। न्यायालय ने उपलब्ध पक्षकारों की दलीलें सुनीं और पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड तैयार किया।

न्यायिक सूत्रों के अनुसार, लोक अदालत का उद्देश्य अदालत के बाहर आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालना था, लेकिन एक पक्ष की अनुपस्थिति के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

अगस्त में होगी विशेष सुनवाई

अब इस मामले की रिपोर्ट तैयार कर सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 से 23 अगस्त के बीच आयोजित विशेष लोक अदालत में इस विवाद पर आगे की सुनवाई होगी। इस दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और न्यायालय आगे की प्रक्रिया तय करेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष भविष्य में वार्ता के लिए तैयार होते हैं तो अदालत समझौते की संभावनाओं पर भी विचार कर सकती है। अन्यथा मामला नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।

लंबे समय से चल रहा है विवाद

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित है। इस मामले में अब तक विभिन्न स्तरों पर अनेक याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी इससे संबंधित कई वादों की सुनवाई चल रही है।

हाल के समय में कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर कर विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की मांग की थी। इसी के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को विशेष लोक अदालत में भेजते हुए दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया था।

कौन-कौन रहा मौजूद

विशेष लोक अदालत में हिंदू पक्ष की ओर से याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, प्रदीप श्रीवास्तव, महावीर प्रसाद, कौशल किशोर, अजय प्रताप सिंह तथा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए विवादित भूमि पर दावा दोहराया।

दूसरी ओर, शाही मस्जिद ईदगाह पक्ष का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिससे समझौते की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

अब विशेष लोक अदालत की पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। अगस्त में होने वाली सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय इस रिपोर्ट पर विचार करेगा और यह तय करेगा कि मामले को मध्यस्थता के जरिए आगे बढ़ाया जाए या नियमित न्यायिक सुनवाई जारी रखी जाए।

इस मामले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक दावों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा संवेदनशील विवाद है। फिलहाल न्यायालय की ओर से सभी पक्षों को शांतिपूर्ण एवं कानूनी तरीके से समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अदालत द्वारा आपसी सहमति के प्रयास सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं। अब सभी की निगाहें अगस्त में होने वाली सुप्रीम कोर्ट की विशेष सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित विवाद की आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

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