GATE AIR-23 हासिल कर DRDO में वैज्ञानिक बने औरैया के रितिक

औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर रितिक कुमार शाक्य ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने पूरे जिले का गौरव बढ़ा दिया है। रितिक का चयन भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत रक्षा अनुसंधान एवं विकास […]

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  • July 4, 2026 10:35 pm IST, Published 2 hours ago

औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर रितिक कुमार शाक्य ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने पूरे जिले का गौरव बढ़ा दिया है। रितिक का चयन भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में वैज्ञानिक पद पर हुआ है। इससे पहले उन्होंने GATE-2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-23 प्राप्त कर अपनी असाधारण क्षमता का परिचय दिया था। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गुरुजन, मित्रों और क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है।

रितिक कुमार शाक्य औरैया जिले की अछल्दा विकासखंड स्थित ग्राम सभा चंदैया के मजरा पूर्वा उजेने के निवासी हैं। उनके पिता अधिवक्ता सत्यभान सिंह शाक्य और माता सुनीता शाक्य हैं। बचपन से ही रितिक पढ़ाई में मेधावी रहे और उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर हमेशा गंभीरता दिखाई। ग्रामीण परिवेश में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों को कभी अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया।

रितिक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रैपिड ग्लोबल स्कूल, बिधूना से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पूर्णचंद्र विद्या निकेतन, कानपुर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT), प्रयागराज में प्रवेश लिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भविष्य में देश की सेवा करने का संकल्प लिया और GATE परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

लगातार मेहनत, अनुशासित अध्ययन और आत्मविश्वास के बल पर रितिक ने GATE-2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-23 प्राप्त की। देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के बीच यह रैंक हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में वैज्ञानिक पद के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद आयोजित साक्षात्कार में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और अंतिम चयन सूची में अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत का प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान है, जो देश की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और रक्षा प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में वैज्ञानिक के रूप में चयन होना किसी भी युवा इंजीनियर के लिए अत्यंत सम्मान की बात मानी जाती है। रितिक की सफलता यह दर्शाती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

रितिक की इस सफलता के बाद पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। परिवार के लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। शिक्षकों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। लोगों का कहना है कि रितिक ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।

पिता अधिवक्ता सत्यभान सिंह शाक्य ने बेटे की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि रितिक बचपन से ही पढ़ाई के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने हमेशा अनुशासन और मेहनत को प्राथमिकता दी। माता सुनीता शाक्य ने कहा कि बेटे की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है और उनकी मेहनत का फल आज सभी के सामने है।

बताया गया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रितिक अपनी नियुक्ति के लिए पुणे रवाना हुए। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने भावुक माहौल में उन्हें विदाई दी। उनके पिता, माता तथा दादा एवं पूर्व प्रधानाध्यापक उदल सिंह ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए देश सेवा के इस नए सफर के लिए आशीर्वाद दिया।

रितिक कुमार शाक्य की सफलता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि सफलता केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनकी उपलब्धि से औरैया जिले का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जा रहा है।

स्थानीय शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने भी रितिक को सम्मानित करने की बात कही है। उनका मानना है कि ऐसे युवाओं की सफलता को समाज के सामने लाया जाना चाहिए ताकि अन्य छात्र भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की ओर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ें। रितिक की यह उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और ग्रामीण भारत की प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण भी साबित होगी।

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