राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच में टिटू यादव का नाम चर्चा में

अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक पूर्व बैंक कैशियर के बयान से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कैशियर ने पूछताछ में दावा किया कि मंदिर परिसर में कुछ व्यक्तियों का प्रभाव अधिक था और […]

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  • July 5, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक पूर्व बैंक कैशियर के बयान से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कैशियर ने पूछताछ में दावा किया कि मंदिर परिसर में कुछ व्यक्तियों का प्रभाव अधिक था और उनमें टिटू यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया। बताया गया कि उसका नाम लेने पर कई स्थानों पर बिना किसी विशेष रोक-टोक के प्रवेश और जांच में छूट मिल जाती थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच एजेंसियों की ओर से नहीं की गई है।

SIT इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और नकदी के रखरखाव की प्रक्रिया में कहीं कोई लापरवाही या सुनियोजित गड़बड़ी तो नहीं हुई। जांच के दौरान कई कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में शामिल पूर्व बैंक कैशियर ने बताया कि शुरुआत में नकदी गिनने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा जांच काफी सख्त होती थी। कर्मचारियों की पूरी तलाशी ली जाती थी और उन्हें निर्धारित ड्रेस पहनने के बाद ही गिनती कक्ष में प्रवेश मिलता था। लेकिन बाद में यह व्यवस्था बदल गई, जिससे निगरानी व्यवस्था पहले जैसी प्रभावी नहीं रही।

कैशियर ने यह भी बताया कि गिनती के दौरान कर्मचारी आपस में अधिक बातचीत नहीं करते थे और सामान्य व्यवहार बनाए रखते थे, ताकि किसी को उन पर संदेह न हो। यदि कभी माहौल सामान्य दिखाने की जरूरत पड़ती थी तो कर्मचारी सामान्य बातचीत या हल्की-फुल्की चर्चा भी करते थे। जांच एजेंसियां इस बयान की सत्यता की पुष्टि के लिए अन्य कर्मचारियों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर के गिनती कक्ष में नकदी और सिक्कों की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती थी। ट्रस्ट के प्रतिनिधि और बैंक कर्मचारी भी इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहते थे। गिनती पूरी होने के बाद नकदी की बंडलिंग की जाती थी, जबकि सिक्कों को अलग-अलग थैलों में सुरक्षित रखा जाता था। इसके बाद पूरी राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे भेजा जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि नकदी गिनने वाले कक्ष तक पहुंचने से पहले कई स्तर की सुरक्षा जांच होती थी। इसके बावजूद यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। SIT अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित चोरी या गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

सूत्रों के अनुसार, कैशियर ने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में कुछ लोगों का प्रभाव इतना अधिक था कि उनके नाम का उल्लेख होने पर सुरक्षा कर्मी अधिक पूछताछ नहीं करते थे। इसी संदर्भ में टिटू यादव का नाम सामने आया है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच जारी है।

SIT तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयानों का विश्लेषण कर रही है। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

इस बीच, मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में आने वाली नकदी के प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक, मजबूत निगरानी प्रणाली और नियमित ऑडिट आवश्यक हैं। इससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।

फिलहाल SIT की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों और बयानों का गहन परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित चोरी के पीछे कौन जिम्मेदार था और सुरक्षा व्यवस्था में किन स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

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