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हॉर्मुज़ संकट के बीच 15 उर्वरक जहाज़ सुरक्षित पहुंचे

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर पड़े असर के बीच भारत ने उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने में बड़ी सफलता हासिल की है। सरकार के अनुसार, उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनके […]

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  • July 6, 2026 11:23 am IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर पड़े असर के बीच भारत ने उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने में बड़ी सफलता हासिल की है। सरकार के अनुसार, उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनके भारत पहुंचने के बाद देश में खाद का भंडार और मजबूत होगा तथा खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। हाल के संघर्षों के कारण इस क्षेत्र में जहाज़ों की आवाजाही को लेकर आशंकाएं बढ़ गई थीं। ऐसे समय में भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों, कूटनीतिक समन्वय और निरंतर निगरानी के जरिए उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखा।

यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की आपूर्ति के लिए भारत ने अनेक देशों से आयात व्यवस्था मजबूत की है। इसके साथ ही विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों ने संभावित आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार का कहना है कि इससे भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होगी और उर्वरक आपूर्ति प्रणाली अधिक मजबूत बनेगी।

भारत की ओर आ रहे जहाज़ों में बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और सल्फर लदा हुआ है। इनके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर खाद का भंडार और मजबूत होगा। इसके अलावा कुछ अन्य जहाज़ भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत के लिए रवाना किए जा रहे हैं, जिनमें अमोनिया, यूरिया और सल्फर शामिल हैं। आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की पूर्ण उपलब्धता मिलने के बाद सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूरिया उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक रहा। डीएपी उत्पादन भी लक्ष्य से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि एनपीके और एसएसपी उर्वरकों के उत्पादन में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे देश की आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ और आगामी कृषि सीजन को ध्यान में रखते हुए देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वार्षिक अनुमानित आवश्यकता का आधे से अधिक स्टॉक पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरक शामिल हैं।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों तथा परिवहन लागत में तेजी आई। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्थाएं कीं, जिससे किसानों पर इसका असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आयात, घरेलू उत्पादन और राज्यों के साथ समन्वय ,तीनों स्तरों पर काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हों।

खरीफ सीजन में खाद की समय पर उपलब्धता खेती के लिए सबसे अहम मानी जाती है। यदि उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होती है तो बुवाई, उत्पादन और किसानों की लागत पर सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का दावा है कि वर्तमान भंडार और लगातार बढ़ते घरेलू उत्पादन के चलते देश में फिलहाल खाद की कोई कमी नहीं होगी और राज्यों को उनकी मांग के अनुरूप उर्वरकों की आपूर्ति जारी रहेगी।

 

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