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मध्य प्रदेश ने बदली वक्फ बोर्ड की तस्वीर, पहली बार गैर-मुस्लिम बने सदस्य

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है और इस व्यवस्था को लागू करने वाला मध्य […]

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  • July 6, 2026 1:32 pm IST, Published 1 hour ago

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है और इस व्यवस्था को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

पुनर्गठित वक्फ बोर्ड में इंदौर के मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही सनवर पटेल को एक बार फिर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। नए बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड के गठन में विविध प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इसी के अनुरूप गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की गई है। इससे पहले वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत गठित राज्य वक्फ बोर्डों में सदस्य केवल मुस्लिम समुदाय से ही नियुक्त किए जाते थे।

राज्य सरकार का मानना है कि नए स्वरूप में गठित बोर्ड से प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे नए कानून के अनुरूप सुधारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि विभिन्न पक्ष इस बदलाव के प्रभावों पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 लागू होने के बाद अन्य राज्यों में भी बोर्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया इसी दिशा में आगे बढ़ सकती है। ऐसे में मध्य प्रदेश का यह कदम देशभर में वक्फ बोर्डों की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस का आधार बन सकता है।

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