भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र चोरी होने की घटना ने उच्च शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बीटेक चौथे सेमेस्टर के नौ प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफों सहित गायब पाए गए, जिसके कारण लगभग 200 विद्यार्थियों की निर्धारित परीक्षा अंतिम समय में स्थगित करनी पड़ी। यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के बीच एक नई चिंता के रूप में देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह आयोजित होने वाली परीक्षा से पहले जब प्रश्नपत्रों की जांच की गई तो नौ विषयों के सीलबंद लिफाफे गायब मिले। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया। परीक्षा केंद्र पहुंचे विद्यार्थियों को बिना परीक्षा दिए वापस लौटना पड़ा, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली।
घटना सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। कुलगुरु डॉ. आलोक शर्मा ने यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (UTD) की परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय में स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई।
प्रश्नपत्र चोरी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सीलबंद प्रश्नपत्र किस तरह गायब हुए, क्या इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका रही और चोरी का उद्देश्य केवल परीक्षा प्रभावित करना था या प्रश्नपत्र लीक करने की कोई बड़ी साजिश भी इसके पीछे थी। विश्वविद्यालय भी अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
इस घटना का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। कई छात्र दूर-दराज़ के जिलों से परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन परीक्षा स्थगित होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का नुकसान उन्हें मानसिक तनाव, अतिरिक्त आर्थिक खर्च और शैक्षणिक अनिश्चितता के रूप में उठाना पड़ रहा है। अब उन्हें नई परीक्षा तिथि का इंतजार करना होगा।
घटना के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब विश्वविद्यालयों के प्रश्नपत्र भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सीलबंद प्रश्नपत्र सुरक्षित नहीं रह पाते हैं तो विद्यार्थियों का परीक्षा प्रक्रिया पर विश्वास कमजोर होता है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की घटनाओं ने पहले ही युवाओं के बीच असंतोष बढ़ाया है। ऐसे में विश्वविद्यालयों के लिए पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह परीक्षा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता बन गई है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि चोरी हुए प्रश्नपत्रों का दुरुपयोग हुआ या नहीं, दोषियों की पहचान कब तक होगी और प्रभावित छात्रों की परीक्षा कब कराई जाएगी। साथ ही यह घटना विश्वविद्यालयों में प्रश्नपत्रों के सुरक्षित भंडारण, निगरानी प्रणाली और जवाबदेही तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती है।