MP में एनालॉग पनीर पर बैन

दूध की जगह वनस्पति से बने पनीर की बिक्री-उत्पादन पर रोक, इंदौर में 1800 किलो पनीर-मावा जब्त भोपाल/इंदौर। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य […]

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  • August 13, 2026 12:42 pm IST, Published 30 seconds ago

दूध की जगह वनस्पति से बने पनीर की बिक्री-उत्पादन पर रोक, इंदौर में 1800 किलो पनीर-मावा जब्त

भोपाल/इंदौर। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए।

सरकार के आदेश के बाद इंदौर जिला प्रशासन और खाद्य एवं औषधि विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी। शहर में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी के दौरान करीब 800 किलो एनालॉग पनीर और 1000 किलो मावा, यानी कुल करीब 1800 किलो सामग्री जब्त की गई।

उमापति इंडस्ट्रीज पर छापा, 450 किलो पनीर बरामद

इंदौर के पालदा इलाके में स्थित उमापति इंडस्ट्रीज पर खाद्य एवं औषधि विभाग ने छापामार कार्रवाई की। यहां से करीब 450 किलो लो-फैट पनीर बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 1.17 लाख रुपये बताई गई है।

अधिकारियों ने जब्त सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में बिक रहे पनीर की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करना है।

क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर को सामान्य तौर पर असली दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कम लागत के कारण ऐसे उत्पादों की मांग और बाजार में उपलब्धता बढ़ने की बात सामने आई है। सरकार ने अब इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है।

MP में रोज 400 क्विंटल तक खपत का अनुमान

जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 400 क्विंटल तक होने का अनुमान है। इस हिसाब से हर महीने लगभग 9 हजार से 12 हजार क्विंटल, यानी करीब 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर की खपत का अनुमान लगाया गया है।

इतनी बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।

मानवाधिकार आयोग ने भी जताई चिंता

एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी चिंता जताई है। आयोग की ओर से मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखकर इस तरह के उत्पादों की बिक्री और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के संबंध में जानकारी मांगे जाने की बात कही गई है।

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एनालॉग पनीर की गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में FSSAI को नोटिस देकर यह पूछा जा रहा है कि ऐसे उत्पादों की बिक्री की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है।

कानूनगो ने यह भी कहा कि केवल किसी उत्पाद पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी लिख देने से उसके संभावित नुकसान खत्म नहीं हो जाते। उन्होंने अन्य राज्यों से भी एनालॉग पनीर को लेकर सख्त कदम उठाने की अपील की।

तीन राज्यों के बाद MP में भी सख्ती

मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में पहले ही एनालॉग पनीर को लेकर सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। अब मध्य प्रदेश में भी इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के बाद खाद्य विभाग की निगरानी बढ़ने की संभावना है।

प्रशासन की ओर से मिलावटी और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खाद्य उत्पादों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।

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