इंदौर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय तक प्रभावी पहुंच के लिए संवाद, गरिमा और समावेशन बेहद जरूरी हैं। न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनकर उनकी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
इंदौर में शनिवार को नेशनल लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (NALSA) की दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का शुभारंभ हुआ। इस दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायाधीशों और विधिक सेवा से जुड़े अधिकारियों को संबोधित किया।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की समस्याएं भी अलग होती हैं। न्याय की आस में किसी व्यक्ति के पास आने पर उसकी आधी परेशानी केवल हमारे व्यवहार से दूर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि जरूरतमंद व्यक्ति से उसकी भाषा में और उसके आत्मसम्मान का ध्यान रखते हुए संवाद किया जाए, तो वह सहज महसूस करता है और न्याय व्यवस्था पर उसका भरोसा मजबूत होता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्याय नागरिकों तक पहुंचना चाहिए, न कि नागरिकों को न्याय पाने के लिए भटकना पड़े। कानूनी सहायता का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब लोगों से केवल बात न की जाए, बल्कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और समझा भी जाए।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि संवाद, गरिमा और समावेशन केवल नारे नहीं, बल्कि कानूनी सहायता व्यवस्था की वास्तविक पहचान हैं। संस्थाओं की जिम्मेदारी नागरिकों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ उन समुदायों से सीखने की भी है, जिनके लिए वे काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के आदिवासी परिवार, गोवा के मछुआरे, गुजरात के प्रवासी श्रमिक और मुंबई में कानूनी सहायता लेने वाली महिलाओं की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए सभी के लिए एक जैसा कानूनी समाधान प्रभावी नहीं हो सकता।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 50 से अधिक न्यायाधीश, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के कार्यकारी अध्यक्ष, विधिवेत्ता और विषय विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
सम्मेलन का विषय ‘एकजुट आवाजें, सशक्त कल- संवाद, गरिमा एवं समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच को आगे बढ़ाना’ है।
दूसरे दिन मध्यस्थता, आदिवासी समुदायों के विधिक सशक्तीकरण, बंदियों के लिए न्याय और बाल-अनुकूल न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर और माता अहिल्याबाई होल्कर की न्याय परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर न्याय के मामले में अपने पुत्र और प्रजा के बीच भेद नहीं करती थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में न्याय हर व्यक्ति की पहुंच में हो और उसे सही समय पर न्याय मिले, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन मेघवाल सहित न्यायपालिका और विधिक सेवा क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।