41 दिन में फैसला: डेढ़ साल के मासूम के हत्यारे को फांसी

शिकोहाबाद: उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। महज 41 दिनों के भीतर अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला न्याय व्यवस्था की तेजी और गंभीर अपराधों के प्रति […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 10, 2026 9:18 pm IST, Published 2 hours ago

शिकोहाबाद: उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। महज 41 दिनों के भीतर अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला न्याय व्यवस्था की तेजी और गंभीर अपराधों के प्रति कठोर रुख का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इस निर्णय ने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है और लोगों ने इसे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

क्या था पूरा मामला?

घटना 30 मई की है, जब शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की बेहद दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने बच्चे को जमीन पर कई बार पटककर उसकी जान ले ली। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मासूम की दर्दनाक मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

रिश्तों के विवाद ने लिया खौफनाक रूप

जांच में सामने आया कि मासूम आरव की मां रीति की शादी बदायूं निवासी सुमित उर्फ प्रियंक से हुई थी। दांपत्य जीवन में विवाद चल रहा था और रीति अपने पति से अलग होना चाहती थी। इसी दौरान आरोपी विराज एकतरफा प्रेम के चलते उस पर शादी का दबाव बना रहा था।

बताया गया कि रीति ने अपने बेटे आरव का हवाला देकर आरोपी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। पुलिस जांच के अनुसार इसी बात से नाराज होकर आरोपी ने मासूम बच्चे को निशाना बनाया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।

पुलिस ने तेजी से की कार्रवाई

घटना सामने आते ही पुलिस ने विभिन्न टीमों का गठन कर जांच शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की गई। घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पूरे मामले में पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और मजबूत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की। अभियोजन पक्ष ने भी तेजी से गवाहों और सबूतों को अदालत के समक्ष रखा, जिसके चलते मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरी हो सकी।

मात्र 41 दिनों में आया फैसला

जनपद न्यायालय ने इस जघन्य अपराध को अत्यंत गंभीर मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई।

बताया जा रहा है कि घटना से लेकर सजा सुनाए जाने तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया लगभग 41 दिनों में पूरी हुई। इतनी कम अवधि में हत्या जैसे गंभीर मामले का फैसला आने को न्यायिक व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मासूम और असहाय बच्चे की निर्मम हत्या समाज के लिए अत्यंत गंभीर अपराध है। ऐसे अपराधों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि निर्दोष बच्चों के खिलाफ अपराध किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

परिवार को मिला न्याय

फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त किया। परिवार का कहना है कि उनका बेटा तो वापस नहीं आ सकता, लेकिन दोषी को मिली कठोर सजा से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है।

स्थानीय लोगों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय से अपराधियों में कानून का डर बढ़ेगा और पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।

पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना मामला

शिकोहाबाद का यह मामला शुरुआत से ही पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मासूम के लिए न्याय की मांग उठाई थी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी।

अब अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग न्यायपालिका की त्वरित कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे “स्पीडी जस्टिस” का उदाहरण बताया है।

कानून विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से की जाए तथा अभियोजन पक्ष प्रभावी ढंग से अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करे, तो गंभीर मामलों का भी जल्द निस्तारण संभव है। उनका कहना है कि इस फैसले से भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा।

समाज के लिए बड़ा संदेश

यह फैसला केवल एक अपराधी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देता है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कानून बेहद सख्त है। त्वरित जांच, मजबूत साक्ष्य और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय दिलाना संभव है।

शिकोहाबाद के इस चर्चित मामले में आया फैसला भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि फांसी की सजा पर आगे उच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं, जैसा कि भारतीय कानून में प्रावधान है।

Advertisement