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असम नागरिकता मामलों में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नयी दिल्ली: असम में नागरिकता से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए विदेशी ट्रिब्यूनल (Foreigners Tribunal) और गुवाहाटी हाईकोर्ट के कुछ आदेशों को निरस्त कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों की फिर से सुनवाई की जाएगी और इसके लिए सभी प्रकरण विदेशी ट्रिब्यूनल को वापस […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 13, 2026 3:39 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्ली: असम में नागरिकता से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए विदेशी ट्रिब्यूनल (Foreigners Tribunal) और गुवाहाटी हाईकोर्ट के कुछ आदेशों को निरस्त कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों की फिर से सुनवाई की जाएगी और इसके लिए सभी प्रकरण विदेशी ट्रिब्यूनल को वापस भेजे जाते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि नया फैसला कानून के अनुरूप और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस आदेश को याचिकाकर्ताओं की नागरिकता पर अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की सत्यता या वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ट्रिब्यूनल को स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों और साक्ष्यों का मूल्यांकन कर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें नागरिकता संबंधी दस्तावेजों में मौजूद मामूली तकनीकी त्रुटियों के आधार पर विदेशी घोषित कर दिया गया। उनका तर्क था कि पुराने मतदाता सूची या अन्य रिकॉर्ड में नाम की वर्तनी में छोटे-छोटे अंतर को आधार बनाकर उन्हें भारतीय नागरिक नहीं माना गया, जबकि ऐसे अंतर प्रशासनिक या रिकॉर्ड संबंधी कारणों से भी हो सकते हैं। उनका यह भी कहना था कि इन त्रुटियों के कारण उन्हें पर्याप्त अवसर दिए बिना प्रतिकूल निर्णय सुनाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों का समुचित मूल्यांकन बेहद आवश्यक है। इसी वजह से अदालत ने विदेशी ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द करते हुए मामलों को दोबारा विचार के लिए वापस भेज दिया। अब ट्रिब्यूनल प्रत्येक मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगा और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

इस मामले में दो महिलाओं—सालेहा खातून और सरभानु बेगम—का मामला भी प्रमुख रहा। इन्हें विदेशी घोषित किए जाने के बाद निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, 5 जून को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए उनके निर्वासन पर रोक लगा दी थी। साथ ही केंद्र सरकार, असम सरकार और चुनाव आयोग से जवाब भी मांगा था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अंतिम सुनवाई पूरी होने तक दोनों महिलाओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

असम में नागरिकता विवाद से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया है कि नागरिकता जैसे संवेदनशील मामलों में केवल तकनीकी कमियों के आधार पर निर्णय देने के बजाय प्रत्येक साक्ष्य और दस्तावेज की गहन जांच आवश्यक है। अब विदेशी ट्रिब्यूनल की दोबारा सुनवाई के बाद ही संबंधित मामलों में अंतिम निर्णय सामने आएगा।

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