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सुप्रीम कोर्ट ने जांच SIT से हटाकर यूपी विजिलेंस को सौंपी,3 महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश

नयी दिल्ली: नोएडा भूमि मुआवजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जांच की जिम्मेदारी विशेष जांच दल (SIT) से हटाकर उत्तर प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विजिलेंस ब्यूरो तत्काल प्रभाव से जांच अपने हाथ में ले और अधिकतम तीन महीने के भीतर […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 13, 2026 4:50 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्ली: नोएडा भूमि मुआवजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जांच की जिम्मेदारी विशेष जांच दल (SIT) से हटाकर उत्तर प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विजिलेंस ब्यूरो तत्काल प्रभाव से जांच अपने हाथ में ले और अधिकतम तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह फैसला कथित अनियमितताओं और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि SIT के पास उपलब्ध सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और साक्ष्य बिना किसी देरी के विजिलेंस विभाग को सौंपे जाएं ताकि जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट तथा संबंधित अदालतों की सुनवाई के बाद ही सामने आएंगे।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। सरकार के अनुसार इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें तीन मामले कथित मिलीभगत और अनियमितताओं से जुड़े हैं, जबकि तीन अन्य मामले आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित हैं। अब इन सभी मामलों की आगे की जांच विजिलेंस ब्यूरो करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच पूरी करने या उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई में अनावश्यक देरी होती है, तो कोई भी जनहित में कार्य करने वाला व्यक्ति हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत का मानना है कि यह मामला सार्वजनिक धन और सरकारी तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा है, इसलिए जांच प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी होनी चाहिए।

एक महत्वपूर्ण राहत किसानों को भी मिली है। अदालत ने पहले से लागू गिरफ्तारी से सुरक्षा (Protection from Arrest) को फिलहाल जारी रखने का आदेश दिया है। इसका अर्थ है कि जांच पूरी होने तक संबंधित किसानों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं की जाएगी, हालांकि जांच प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रहेगी।

यह मामला नोएडा प्राधिकरण में भूमि अधिग्रहण मुआवजे के भुगतान से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ भूमि मालिकों को नियमों के विपरीत अधिक मुआवजा दिया गया और इसमें अधिकारियों तथा कुछ लाभार्थियों के बीच कथित मिलीभगत रही। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पर्यावरण संबंधी एक पूर्व आदेश पर भी स्पष्टीकरण मांगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) नियमों के तहत जिन परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरण मंजूरी आवश्यक है, वही आदेश के दायरे में आएंगी। जिन परियोजनाओं को 14 सितंबर 2006 की अधिसूचना के तहत छूट प्राप्त है, उन्हें संबंधित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा।

अब इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण विजिलेंस ब्यूरो की जांच होगी। तीन महीने की समयसीमा तय होने के कारण उम्मीद की जा रही है कि जांच अपेक्षाकृत तेजी से पूरी होगी और उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

 

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