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चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक का Video Viral, रेलवे ने दी सफाई

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय रेलवे के एक विशेष सैलून कोच का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में चलती ट्रेन के भीतर विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना होते हुए दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई कि […]

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  • July 13, 2026 11:00 pm IST, Published 4 hours ago

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय रेलवे के एक विशेष सैलून कोच का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में चलती ट्रेन के भीतर विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना होते हुए दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई कि क्या रेलवे ने ट्रेन के अंदर धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दी थी या फिर यह नियमों का उल्लंघन है। बढ़ते विवाद के बीच उत्तर रेलवे ने पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए वायरल दावों की सच्चाई बताई है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में कुछ लोग विशेष सैलून कोच के अंदर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते दिखाई दे रहे हैं। पूजा के लिए वेदी सजाई गई है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है। वीडियो में ट्रेन चलती हुई प्रतीत होती है, जिसके कारण लोगों ने सवाल उठाए कि क्या रेलवे के सामान्य कोच में इस तरह का आयोजन किया जा सकता है।

वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे प्रशासन से जवाब मांगा। कुछ लोगों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया, जबकि कई लोगों ने धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए इसका समर्थन भी किया।

रेलवे ने जारी की आधिकारिक सफाई

विवाद बढ़ने के बाद उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच का नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से बुक किए गए विशेष सैलून कोच का है। रेलवे के अनुसार संबंधित पार्टी ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के माध्यम से इस कोच को विधिवत बुक कराया था।

रेलवे ने बताया कि इस विशेष सैलून कोच की बुकिंग के लिए करीब 3.08 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। यह सुविधा विशेष अवसरों, निजी यात्राओं, कॉर्पोरेट कार्यक्रमों और समूह यात्राओं के लिए उपलब्ध रहती है।

क्या होता है सैलून कोच?

भारतीय रेलवे का सैलून कोच एक विशेष श्रेणी का कोच होता है, जिसे निजी उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क पर बुक कराया जा सकता है। इसमें सामान्य कोच की तुलना में अधिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस प्रकार के कोच का उपयोग कई बार सरकारी अधिकारियों, विशेष अतिथियों या निजी आयोजनों के लिए भी किया जाता है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संस्था निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सैलून कोच बुक करती है, तो वह कोच निर्धारित शर्तों के तहत निजी उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

सुरक्षा नियमों का पालन किया गया

रेलवे ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई पूरी गतिविधि के दौरान सुरक्षा संबंधी किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। पूजा-पाठ के आयोजन से किसी यात्री को असुविधा नहीं हुई और न ही ट्रेन संचालन पर कोई प्रभाव पड़ा।

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोजन पूरी तरह बुक किए गए निजी कोच के भीतर हुआ था तथा इसमें रेलवे की सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि यदि पूरा कोच निजी रूप से बुक किया गया था तो ऐसे आयोजन में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं कुछ अन्य यूजर्स का मानना था कि सार्वजनिक परिवहन में धार्मिक आयोजनों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न फैले।

कई लोगों ने रेलवे की सफाई के बाद माना कि बिना पूरी जानकारी के वीडियो वायरल होने से भ्रम की स्थिति बन गई थी।

IRCTC के जरिए होती है बुकिंग

रेलवे अधिकारियों के अनुसार विशेष सैलून कोच की बुकिंग IRCTC की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। इच्छुक व्यक्ति या संस्था तय शुल्क जमा कर विशेष कोच बुक करा सकती है। बुकिंग के दौरान यात्रा मार्ग, समय, यात्रियों की संख्या और अन्य औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक होता है।

हालांकि निजी उपयोग की अनुमति होने के बावजूद सभी गतिविधियां रेलवे के सुरक्षा नियमों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही होनी चाहिए।

गलतफहमियों पर रेलवे की अपील

रेलवे ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो या पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी वास्तविकता और आधिकारिक जानकारी की पुष्टि कर लें। अधूरी जानकारी के आधार पर फैलने वाली अफवाहें भ्रम पैदा कर सकती हैं।

रेलवे का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यह किसी सामान्य यात्री कोच में हुआ आयोजन है, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी। इसलिए तथ्यों को समझना और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।

चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि उत्तर रेलवे की सफाई के बाद स्पष्ट हो गया कि यह किसी सामान्य यात्री कोच में नहीं बल्कि लगभग 3.08 लाख रुपये में विधिवत बुक किए गए विशेष सैलून कोच में आयोजित निजी धार्मिक कार्यक्रम था। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया और किसी यात्री को कोई असुविधा नहीं हुई। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन से अधिक अधूरी जानकारी के कारण पैदा हुए भ्रम का उदाहरण बनकर सामने आया।

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