नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को फिलहाल गर्मी और उमस से पूरी तरह राहत मिलने के आसार नहीं हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत महसूस हो सकती है। दूसरी ओर, राजधानी की हवा की गुणवत्ता (AQI) में अचानक आई गिरावट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और पिछले करीब 85 दिनों का सबसे अधिक स्तर बताया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में मानसून सक्रिय रहने के बावजूद वातावरण में नमी का स्तर काफी अधिक बना हुआ है। इसी कारण लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। दिन के समय तेज धूप और बादलों की आवाजाही के बीच तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर बना रह सकता है। अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण तापमान में हल्की राहत मिल सकती है, लेकिन हवा की दिशा और गति में बदलाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। यही वजह है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार 0 से 50 तक AQI को ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान में 261 का AQI संवेदनशील लोगों, बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी रोगियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कण (PM2.5 और PM10) का स्तर बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में अस्थमा, फेफड़ों और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि अगले कुछ दिनों में हल्के बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। यदि बारिश होती है तो वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल बड़े स्तर पर बारिश के संकेत नहीं हैं, इसलिए उमस और गर्मी से तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें स्थानीय धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली मिट्टी और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां प्रमुख हैं। तेज हवाएं कभी-कभी बाहरी क्षेत्रों से भी धूल लेकर आती हैं, जिससे AQI में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह और शाम के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो मास्क का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। बच्चों और बुजुर्गों को अधिक समय तक खुले वातावरण में रहने से बचाने की भी सलाह दी गई है।
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार वायु गुणवत्ता पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, पानी का छिड़काव और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की निगरानी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी, हरित क्षेत्र का विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के दौरान भी कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जब नमी अधिक होने और हवा की दिशा बदलने से प्रदूषक वातावरण में फंस जाते हैं। इससे AQI अचानक खराब हो जाता है। आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश होती है तो प्रदूषण का स्तर कम हो सकता है।
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के लोगों को गर्मी, उमस और खराब हवा—तीनों चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग की सलाह है कि नागरिक नियमित रूप से मौसम और AQI अपडेट पर नजर रखें तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें। आने वाले सप्ताह में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन तेज हवाओं और हल्की बारिश के कारण कुछ समय के लिए राहत जरूर मिल सकती है। वहीं प्रदूषण का स्तर कब तक सुधरेगा, यह आगामी मौसमीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।