पुरी : भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा को लेकर धार्मिक नगरी पुरी पूरी तरह सज चुकी है। 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह नौ दिवसीय महापर्व 24 जुलाई तक चलेगा। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन और रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं। इस वर्ष दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं।
रथ यात्रा के आयोजन से पहले ही पुरी के लगभग सभी होटल, लॉज और धर्मशालाएं पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, इस बार फरवरी महीने से ही बुकिंग का सिलसिला शुरू हो गया था। सबसे अधिक मांग उन होटलों और लॉज की रही, जिनकी बालकनी या खिड़की सीधे रथ यात्रा मार्ग की ओर खुलती है। श्रद्धालु चाहते हैं कि बिना भीड़ में उतरे भी वे भगवान के रथों के दर्शन कर सकें।
बढ़ती मांग का असर होटल किरायों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में डेढ़ से दो हजार रुपये प्रतिदिन किराए वाले कई लॉज रथ यात्रा के दौरान तीन दिनों के लिए लगभग 50 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। होटल संचालकों का कहना है कि हर साल रथ यात्रा के दौरान मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पहले से कहीं अधिक रहने की उम्मीद है।
इस बार रथ यात्रा में कई नई व्यवस्थाएं पहली बार लागू की गई हैं। प्रशासन ने पूरे रथ यात्रा मार्ग को एक समान हल्के गुलाबी रंग से सजाया है, जिससे पूरे क्षेत्र को आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप मिला है। श्रीमंदिर से लेकर गुंडिचा मंदिर तक का मार्ग विशेष सजावट और प्रकाश व्यवस्था से जगमगा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव देने के साथ-साथ शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
भीड़ को सुरक्षित ढंग से नियंत्रित करने के लिए इस वर्ष पहली बार इमरजेंसी इवैक्यूएशन कॉरिडोर तैयार किए गए हैं। यदि किसी स्थान पर भीड़ अत्यधिक बढ़ती है या किसी आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है तो इन्हीं विशेष मार्गों से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और राहत दल तुरंत घटनास्थल तक पहुंच सकेंगे। इससे किसी भी आपदा की स्थिति में राहत कार्य तेजी से किया जा सकेगा।
रियल टाइम क्राउड मैनेजमेंट भी इस बार की प्रमुख विशेषता है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित किए हैं। कंट्रोल रूम से लगातार भीड़ की निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर लोगों की आवाजाही को अलग-अलग मार्गों की ओर मोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।
तकनीक का उपयोग भी इस वर्ष रथ यात्रा की सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। पहली बार पूरे आयोजन की निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरों, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी, ड्रोन और अत्याधुनिक कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाएगी। इन प्रणालियों की मदद से भीड़ की गतिविधियों, संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों को तत्काल अलर्ट भेजा जाएगा। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीमें लगातार तैयार रहेंगी।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का विशाल उत्सव है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस महापर्व का हिस्सा बनते हैं और भगवान के रथ को खींचने को जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य मानते हैं। इस बार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक श्रद्धा का अनूठा संगम इस आयोजन को और भी विशेष बना रहा है।