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बुलडोजर जस्टिस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट करेंगे सुनवाई

नई दिल्ली: बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हर कार्रवाई कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 16, 2026 5:07 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हर कार्रवाई कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी पहचान, वर्ग या आरोपों के आधार पर चुनकर निशाना नहीं बनाया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2024 के फैसले की अवमानना का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने को कहा। अदालत ने माना कि इन मामलों में कई तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनकी जांच के लिए साक्ष्यों और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता होगी। इसलिए अब इन मामलों पर फैसला संबंधित हाई कोर्ट करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में पहले से अंतरिम संरक्षण दिया गया है, वह फिलहाल जारी रहेगा। साथ ही हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया कि यदि संभव हो तो इन मामलों की सुनवाई चार महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दोषी साबित होने से पहले निर्दोष माना जाना न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है। अदालत ने कहा कि पिछले वर्ष जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य मनमानी कार्रवाई पर रोक लगाना और यह सुनिश्चित करना था कि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करे।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि जब अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों की कथित मिलीभगत के कारण कानून का शासन कमजोर पड़ता है, तब अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल आवश्यक हो सकता है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत और उचित कारणों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को कम से कम 15 दिन पहले लिखित कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस के तोड़फोड़ नहीं की जा सकती। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति को स्थानीय निकाय के समक्ष अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

अदालत के निर्देशों के अनुसार, नोटिस, जवाब और अंतिम आदेश को डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। अंतिम ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद भी प्रभावित व्यक्ति को कानूनी अपील करने या सुरक्षित रूप से परिसर खाली करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों ने दो बातों को एक साथ रेखांकित किया है पहली, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रशासन का अधिकार; और दूसरी, नागरिकों के प्राकृतिक न्याय तथा कानूनी संरक्षण के अधिकारों की अनिवार्य रक्षा। अब बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े विवादों की आगे की सुनवाई संबंधित हाई कोर्ट में होगी, जहां प्रत्येक मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

 

 

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