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महिला आरक्षण पर कांग्रेस का खुला समर्थन, परिसीमन पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर […]

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  • July 16, 2026 3:05 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार के रुख का विरोध जारी रखेगी।

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी अपना रुख साफ किया था और आज भी उसमें कोई बदलाव नहीं है। उनका कहना था कि यदि सरकार मौजूदा 543 सदस्यीय लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 181 सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करने वाला विधेयक लाती है, तो कांग्रेस उसका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लाए गए कानून को महिला आरक्षण का नाम दिया गया, लेकिन उसमें परिसीमन की शर्त जोड़ दी गई। कांग्रेस का मानना है कि इस तरह महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं है और इससे मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में कुछ विपक्षी दलों के भीतर टूट देखने को मिली है, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उनके अनुसार, यदि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में राजनीतिक दलों को तोड़कर विशेष बहुमत हासिल करने का प्रयास किया जाता है, तो यह संविधान की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

जयराम रमेश ने दावा किया कि लोकसभा में सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार विपक्षी दलों के संपर्क में है और इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर बातचीत जारी है। उनके अनुसार, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी विभिन्न विपक्षी नेताओं के साथ संवाद कर रहे हैं, ताकि संसद में साझा रणनीति बनाई जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य किसी सकारात्मक विधेयक का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन प्रस्तावों पर सवाल उठाना है जिनका दूरगामी प्रभाव देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण का समर्थन और परिसीमन से जुड़े सवाल दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संसद में सरकार इन प्रस्तावों को किस रूप में पेश करती है और विपक्ष अपनी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाता है।

 

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