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रघुराम राजन का बढ़ा वैश्विक कद, अमेरिकी फेड की अहम टीम में मिली जगह

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक जगत में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री रघुराम राजन को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब दुनिया की […]

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  • July 16, 2026 4:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक जगत में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री रघुराम राजन को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपनी मौद्रिक नीति और वित्तीय ढांचे की व्यापक समीक्षा की तैयारी कर रही है। आर्थिक विशेषज्ञ इसे भारत की बौद्धिक क्षमता और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भारतीय विशेषज्ञों के बढ़ते प्रभाव का संकेत मान रहे हैं।

फेडरल रिजर्व के नेतृत्व ने हाल ही में पांच विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इन समूहों का उद्देश्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों का गहन अध्ययन करना और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप नीतिगत सुधारों का खाका तैयार करना है। इन टास्क फोर्स को मौद्रिक नीति, फेड की बैलेंस शीट, आर्थिक आंकड़ों की विश्वसनीयता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोजगार, उत्पादकता, महंगाई और संस्थागत कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।

रघुराम राजन को जिस टास्क फोर्स में शामिल किया गया है, उसका मुख्य दायित्व फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा करना है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए कई असाधारण कदम उठाए थे, जिनमें बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीद और वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़ाने जैसी नीतियां शामिल थीं। अब विशेषज्ञों की यह टीम मूल्यांकन करेगी कि वे नीतियां वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी हैं और भविष्य के लिए उनमें किन सुधारों की आवश्यकता है।

यह टास्क फोर्स अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें फेड नेतृत्व को सौंपेगी। माना जा रहा है कि इन सुझावों के आधार पर भविष्य में अमेरिकी मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता और केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। चूंकि अमेरिकी फेड के फैसलों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, निवेश, ब्याज दरों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है, इसलिए इस समीक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस पहल में भारतीय मूल के अन्य विशेषज्ञों को भी अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री राज चेट्टी को आर्थिक आंकड़ों और डेटा विश्लेषण से जुड़े समूह में शामिल किया गया है। वहीं, तकनीकी क्षेत्र की विशेषज्ञ आशा शर्मा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोजगार और उत्पादकता पर काम करने वाली टास्क फोर्स में स्थान मिला है। इन नियुक्तियों को वैश्विक नीति निर्माण में भारतीय प्रतिभाओं की बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।

रघुराम राजन लंबे समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सुधार और वित्तीय स्थिरता से जुड़े विषयों पर अपनी गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, महंगाई नियंत्रण और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। उनके कार्यकाल को भारत की आर्थिक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

आरबीआई के अलावा रघुराम राजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे वैश्विक आर्थिक नीतियों, वित्तीय जोखिमों और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर नियमित रूप से अपने विचार रखते हैं। यही अनुभव उन्हें दुनिया के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञों की श्रेणी में स्थापित करता है।

आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेड की इन टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने वाले वर्षों में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे में रघुराम राजन की भागीदारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय विशेषज्ञता की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती विश्वसनीयता का भी प्रतीक है।

आने वाले महीनों में सभी टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी। इसके बाद फेडरल रिजर्व इन सिफारिशों पर विचार कर भविष्य की मौद्रिक नीति, वित्तीय प्रबंधन और संस्थागत सुधारों को लेकर निर्णय ले सकता है। इस पूरी प्रक्रिया पर दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, निवेशक और आर्थिक विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिकी फेड के फैसलों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ता है।

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