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गगनयान मिशन के बीच ISRO में हलचल, वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर केंद्र सख्त

नई दिल्ली: भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेष रूप से मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान, से जुड़े वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख केंद्रों के लिए नए दिशा-निर्देश […]

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  • July 16, 2026 5:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेष रूप से मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान, से जुड़े वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख केंद्रों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले अधिक सख्त बना दिया है।

अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि हाल के समय में ग्रुप-ए श्रेणी के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों की ओर से नौकरी छोड़ने के अनुरोधों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें कई ऐसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। विभाग का मानना है कि यदि अनुभवी वैज्ञानिक बड़ी संख्या में संस्थान छोड़ते हैं, तो इससे चल रहे मिशनों की गति और समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

इसी स्थिति को देखते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि गगनयान तथा अन्य रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे प्रत्येक मामले की अलग से समीक्षा की जाएगी और अंतिम निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाएगा।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, वैज्ञानिक या इंजीनियर स्तर तथा उससे नीचे के ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा भेजे गए इस्तीफे या वीआरएस आवेदन संबंधित केंद्र के निदेशक की स्पष्ट अनुशंसा के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। अंतिम निर्णय विभाग द्वारा सभी तथ्यों और परियोजना की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि गगनयान जैसे मिशन केवल वैज्ञानिक उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का अचानक संस्थान छोड़ना परियोजनाओं की निरंतरता और गुणवत्ता पर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे अत्यधिक विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में प्रशिक्षित वैज्ञानिकों का विकल्प तैयार करने में वर्षों लग जाते हैं। इसलिए किसी भी बड़े मिशन के दौरान अनुभवी मानव संसाधन को बनाए रखना परियोजनाओं की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, अंतरिक्ष विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के अनुरोधों को पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया जाएगा, बल्कि प्रत्येक आवेदन की परिस्थितियों, संबंधित परियोजना में उनकी भूमिका और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। केंद्र सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत गगनयान मिशन के साथ-साथ कई अन्य महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य वैज्ञानिकों को रोकना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में आवश्यक विशेषज्ञता और कार्यबल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

 

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