लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती नफरत चिंता का विषय है और समाज को आपसी भाईचारे तथा संविधान की भावना के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
अरशद मदनी ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में सभी समुदायों ने मिलकर योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि आज भी देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था या व्यक्ति से कोई गलती हुई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि कोई वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता है तो उसके लिए नियमानुसार जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन फैसले कानून के दायरे में होने चाहिए।
ज्ञानवापी मामले पर बोलते हुए मदनी ने कहा कि इस विवाद का अंतिम समाधान अदालत के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है और सभी पक्षों को न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में सामाजिक सौहार्द, कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।