जंतर-मंतर विवाद पर गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने भाजपा को घेरा

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के मुद्दे ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने […]

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  • July 18, 2026 3:35 pm IST, Published 52 minutes ago

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के मुद्दे ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ किया गया व्यवहार देश की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाता है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति संवाद के बजाय दमन पर आधारित है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित होती है।

सपा प्रमुख ने मांग की कि अनशन स्थल पर कार्रवाई करने वाले सादी वर्दी में मौजूद अधिकारियों या कर्मियों की पहचान सार्वजनिक की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी चिकित्सा न्यायिक निगरानी में कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि देश और दुनिया इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि दमनात्मक उपायों से। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीतिक शैली विरोध की आवाजों को दबाने की रही है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सम्मान किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा डिजिटल माध्यमों से अपनी बात प्रभावी ढंग से रख रहा है और विचारों को दबाकर लोकतांत्रिक विमर्श को रोका नहीं जा सकता।

सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है।

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