नई दिल्ली। केरल वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर केरल हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए अंतरिम प्रतिबंध के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की तात्कालिकता का हवाला देते हुए केरल सरकार की ओर से शीर्ष अदालत से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया, जिसे स्वीकार करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। अब इस मामले पर सप्ताह की शुरुआत में सुनवाई होने की संभावना है।
विवाद की शुरुआत केरल हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश से हुई, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना कोई भी बड़ा प्रशासनिक या नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि बोर्ड किसी भी प्रकार का बड़ा पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पूर्व अनुमति के बिना नहीं कर सकेगा। हाई कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार और राज्य वक्फ बोर्ड ने इसे प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर प्रभाव डालने वाला कदम बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता वी. चितंबरेश ने मामले का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत को बताया कि बिना दूसरे पक्ष को नोटिस दिए जारी अंतरिम आदेश के कारण वक्फ बोर्ड की सामान्य कार्यप्रणाली लगभग ठप हो गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड से जुड़े एक समान मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले अंतरिम राहत दे चुका है। दलीलों पर विचार करने के बाद पीठ ने मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।
केरल हाई कोर्ट के समक्ष दायर कई जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राज्य वक्फ बोर्ड का गठन कानून के अनुरूप नहीं है। याचिकाओं में कहा गया कि संशोधित कानून के अनुसार बोर्ड में आवश्यक गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई, जिससे उसकी वैधानिक संरचना अधूरी है।
इसी आधार पर अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए बोर्ड की शक्तियों पर अस्थायी रोक लगाई और राज्य सरकार को आवश्यक नियुक्तियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह संशोधित कानून के प्रावधानों के अनुरूप बोर्ड में अपने प्रतिनिधि की नियुक्ति सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि फिलहाल बोर्ड का प्रशासन संबंधित विभाग के अधिकृत सरकारी अधिकारी की निगरानी में संचालित होगा।
वक्फ संशोधन कानून के लागू होने के बाद बोर्ड की संरचना में कई बदलाव किए गए थे। संशोधित प्रावधानों के तहत वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। इस संशोधन को देशभर में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से चुनौती भी दी गई, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में अलग से सुनवाई चल रही है।
हालांकि शीर्ष अदालत ने अब तक संशोधित कानून के इस प्रावधान पर रोक नहीं लगाई है। ऐसे में केरल वक्फ बोर्ड से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक अधिकारों और संशोधित कानूनी व्यवस्था, दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई यह तय करेगी कि हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश फिलहाल जारी रहेगा या वक्फ बोर्ड को अपने नियमित प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल की अंतरिम राहत मिलेगी। इस फैसले का असर केवल केरल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में वक्फ बोर्डों से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।