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संसद में सरकार का दावा, एथनॉल मिश्रण से पेट्रोल कीमतों पर लगी लगाम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) की नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया कि इस पहल ने देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के अनुसार यदि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता, तो […]

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  • August 1, 2026 1:16 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) की नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया कि इस पहल ने देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के अनुसार यदि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता और पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि एथनॉल की घरेलू खरीद और पेट्रोल में उसके मिश्रण की नीति ने न केवल ईंधन की लागत को नियंत्रित रखने में मदद की, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत किया है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान इस नीति का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।

एथनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार कई वर्षों से पेट्रोल में निर्धारित प्रतिशत तक एथनॉल मिलाने की नीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है।

सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित एथनॉल के उपयोग से विदेशी मुद्रा की बचत होती है और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित रहता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और कई देशों में ईंधन महंगा हुआ, तब भारत में एथनॉल मिश्रण की वजह से कीमतों पर दबाव कम रहा।

सरकार ने दावा किया कि यदि यह नीति लागू नहीं होती और कच्चे तेल का मूल्य लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता, तो देश में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी। इसके विपरीत, एथनॉल मिश्रण और घरेलू खरीद व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं को लगभग 30 रुपये प्रति लीटर तक की संभावित राहत मिली और पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बनी रही।

एथनॉल कार्यक्रम केवल ईंधन नीति नहीं, बल्कि कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को जोड़ने वाली रणनीति भी है। एथनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना और अन्य फसलों की मांग में वृद्धि होती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिलता है। इसके साथ ही देश का आयात बिल कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी यह नीति सहायक मानी जा रही है।

एथनॉल मिश्रण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना भी है। पेट्रोल में जैव ईंधन मिलाने से पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की खपत घटती है, जिससे प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। सरकार लंबे समय से हरित ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर देती रही है, जिसमें एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

सरकार का लक्ष्य भविष्य में एथनॉल मिश्रण के स्तर को और बढ़ाना है, ताकि आयातित तेल पर निर्भरता कम हो और देश की ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सके। हालांकि, इस नीति की सफलता उत्पादन क्षमता, कच्चे माल की उपलब्धता, वितरण नेटवर्क और ईंधन गुणवत्ता जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करेगी। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में एथनॉल आधारित ईंधन नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगी तथा उपभोक्ताओं, किसानों और अर्थव्यवस्था—तीनों को इसका लाभ मिलेगा।

 

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