• होम
  • दिल्ली/NCR
  • RAC यात्री को एक कंबल देना रेलवे को पड़ा भारी, कोर्ट सख्त

RAC यात्री को एक कंबल देना रेलवे को पड़ा भारी, कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की सेवाओं को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला एक RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर यात्रा कर रहे दो यात्रियों से जुड़ा […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 1, 2026 9:00 pm IST, Published 20 minutes ago

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की सेवाओं को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला एक RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर यात्रा कर रहे दो यात्रियों से जुड़ा है, जिन्हें सफर के दौरान अलग-अलग कंबल उपलब्ध नहीं कराए गए थे। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जब रेलवे दोनों यात्रियों से अलग-अलग बेडरोल शुल्क वसूलता है, तो प्रत्येक यात्री को अलग कंबल और पूरी बेडरोल सुविधा मिलनी चाहिए।

यह फैसला न केवल रेलवे के लिए बल्कि देशभर में RAC टिकट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भी अहम माना जा रहा है। आयोग ने कहा कि यात्रियों को भुगतान के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सेवा में कमी की श्रेणी में आती है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला अक्टूबर 2022 का है। शिकायतकर्ता ने RAC टिकट पर यात्रा की थी, जिसमें दो यात्रियों को एक ही बर्थ साझा करनी थी। यात्रा के दौरान रेलवे की ओर से दोनों यात्रियों को केवल एक कंबल उपलब्ध कराया गया। जबकि दोनों यात्रियों से अलग-अलग बेडरोल शुल्क लिया गया था।

यात्रियों ने ट्रेन स्टाफ से अलग कंबल की मांग की, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि रेलवे ने यात्रियों से शुल्क लेने के बावजूद निर्धारित सुविधा उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।

आयोग ने क्या कहा?

उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे यात्रियों से बेडरोल शुल्क अलग-अलग वसूलता है। ऐसे में यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि RAC यात्रियों को एक ही कंबल दिया जाए। आयोग ने इसे सेवा में स्पष्ट कमी माना और रेलवे को शिकायतकर्ता को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

आयोग ने यह भी कहा कि यात्रियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और टिकट की श्रेणी चाहे RAC हो या कन्फर्म, यदि सुविधा का शुल्क लिया गया है तो सुविधा भी पूरी दी जानी चाहिए।

RAC टिकट क्या होता है?

RAC यानी Reservation Against Cancellation ऐसी टिकट होती है जिसमें यात्री को यात्रा की अनुमति तो मिल जाती है, लेकिन शुरुआत में पूरी बर्थ नहीं मिलती। आमतौर पर दो RAC यात्रियों को एक साइड लोअर बर्थ साझा करनी पड़ती है। यदि यात्रा शुरू होने से पहले या यात्रा के दौरान कोई सीट खाली होती है, तो RAC टिकट कन्फर्म हो सकती है।

हालांकि सीट साझा करने का नियम केवल बैठने और सोने की व्यवस्था तक सीमित है। आयोग के फैसले के अनुसार बेडरोल जैसी व्यक्तिगत सुविधाओं में कटौती नहीं की जा सकती।

यात्रियों के अधिकार हुए मजबूत

इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई सरकारी या निजी संस्था किसी सुविधा के लिए शुल्क लेती है, तो उसे वह सुविधा पूरी तरह उपलब्ध करानी होगी।

रेलवे हर साल करोड़ों यात्रियों को यात्रा सुविधा उपलब्ध कराता है। ऐसे में छोटे-छोटे मामलों में भी यात्रियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यह फैसला भविष्य में रेलवे प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

रेलवे की जिम्मेदारी

भारतीय रेलवे समय-समय पर यात्रियों की सुविधाओं में सुधार के लिए कई कदम उठाता रहा है। लेकिन कई बार ट्रेन में बेडरोल, साफ-सफाई, खानपान और अन्य सेवाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला रेलवे को सेवा गुणवत्ता सुधारने के लिए भी प्रेरित करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेन स्टाफ को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए कि RAC यात्रियों को भी भुगतान के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे यात्रियों की शिकायतें कम होंगी और रेलवे की छवि भी बेहतर होगी।

यात्रियों को क्या करना चाहिए?

यदि किसी यात्री से किसी सुविधा का शुल्क लिया जाता है लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो वह पहले रेलवे के संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सकता है। यदि समाधान नहीं मिलता है, तो उपभोक्ता आयोग का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।

डिजिटल युग में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है। यात्री ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन और उपभोक्ता मंच के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

फैसला क्यों है महत्वपूर्ण?

यह निर्णय केवल एक कंबल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा का बड़ा संदेश देता है। आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि किसी सेवा का शुल्क लिया गया है, तो सेवा पूरी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से देना सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है। भविष्य में यह फैसला ऐसे अन्य मामलों में भी मिसाल बन सकता है और रेलवे सहित अन्य सेवा प्रदाताओं को अधिक जवाबदेह बनाएगा।

Advertisement