• होम
  • छत्तीसगढ़
  • स्वामी आत्मानंद के संविदा शिक्षक-कर्मचारी उतरे धरने पर

स्वामी आत्मानंद के संविदा शिक्षक-कर्मचारी उतरे धरने पर

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो बड़े मुद्दों को लेकर शिक्षक समुदाय सड़क पर उतर आया है। एक ओर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षक और कर्मचारी अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यायाम शिक्षक (स्पोर्ट्स टीचर) लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया शुरू […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 5, 2026 1:15 pm IST, Published 2 hours ago

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो बड़े मुद्दों को लेकर शिक्षक समुदाय सड़क पर उतर आया है। एक ओर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षक और कर्मचारी अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यायाम शिक्षक (स्पोर्ट्स टीचर) लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इन दोनों आंदोलनों ने राज्य में शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को फिर केंद्र में ला दिया है।

राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर बड़ी संख्या में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के संविदा शिक्षक और कर्मचारी दो दिवसीय धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, सेवा सुरक्षा, शासकीय सुविधाओं का लाभ, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा सेवा शर्तों में सुधार शामिल हैं। उनका कहना है कि प्रदेशभर के आत्मानंद विद्यालयों की सफलता में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संविदा व्यवस्था के कारण नौकरी की स्थिरता नहीं होने से मानसिक और आर्थिक असुरक्षा बनी रहती है। उनका तर्क है कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकें। संविदा शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

इसी बीच दुर्ग में प्रदेशभर से पहुंचे व्यायाम शिक्षकों ने भी अपनी अलग मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। बड़ी संख्या में प्रशिक्षित स्पोर्ट्स टीचर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मिलने पहुंचे और लंबित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। व्यायाम शिक्षकों का कहना है कि हाल ही में घोषित लगभग 3000 शिक्षकों की भर्ती में खेल शिक्षकों के लिए एक भी पद शामिल नहीं किया गया। इससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों में निराशा है। उनका आरोप है कि प्रारंभिक प्रस्ताव में खेल शिक्षकों के लगभग 300 पद शामिल थे, लेकिन अंतिम भर्ती विज्ञापन से उन्हें हटा दिया गया।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने नई शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए कहा कि प्राथमिक स्तर से शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया गया है। इसके लिए पाठ्यपुस्तकें भी तैयार की जा चुकी हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में पर्याप्त व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से नीति का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और खेल विभाग में प्रशिक्षित खेल शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की खेल प्रतिभा पर पड़ रहा है। यदि समय पर योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी इसका असर दिखाई देगा।

स्पोर्ट्स टीचरों के अनुसार, व्यायाम शिक्षकों की अंतिम भर्ती वर्ष 2019 में हुई थी। उसके बाद से नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को खेल शिक्षा को केवल नीति तक सीमित न रखकर नियुक्तियों के माध्यम से जमीन पर भी लागू करना चाहिए। दोनों आंदोलनों ने राज्य सरकार के सामने शिक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार संविदा कर्मचारियों की मांगों और खेल शिक्षकों की भर्ती को लेकर क्या निर्णय लेती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

Advertisement