ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मुंबई एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने दो विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किए जाने का दावा किया है। कार्रवाई में कथित तौर पर भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.40 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियों की सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, संयुक्त कार्रवाई ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमिक्रॉन इलाके में की गई। पुलिस और जांच एजेंसियों को आशंका थी कि इलाके में मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसी सूचना के आधार पर एक फ्लैट पर निगरानी और जांच के बाद कार्रवाई की गई।
2.688 किलो मेथामफेटामाइन बरामद होने का दावा
अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान करीब 2.688 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया गया। यह एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसकी अवैध बाजार में काफी मांग बताई जाती है। बरामद पदार्थ और उसे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कथित कच्चे माल की कीमत करीब 5.40 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मेथामफेटामाइन की बरामदगी को एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इस तरह के सिंथेटिक ड्रग की तस्करी और सप्लाई का नेटवर्क अक्सर कई शहरों और राज्यों तक फैला हो सकता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब बरामदगी के स्रोत और इसके संभावित खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
कौन हैं गिरफ्तार की गई महिलाएं?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई में दो नाइजीरियन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। दोनों महिलाओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर कथित ड्रग नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि महिलाएं ग्रेटर नोएडा में कब से रह रही थीं और उनका संपर्क किन लोगों से था।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि बरामद ड्रग्स की सप्लाई कहां से हुई और इसे आगे किन स्थानों पर भेजा जाना था। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
मुंबई ले जाया गया ट्रांजिट रिमांड पर
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई ले जाया गया है। वहां जांच एजेंसियां उनसे विस्तृत पूछताछ कर सकती हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान ड्रग्स की खरीद, सप्लाई, संपर्क और संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं।
जांच एजेंसियां बरामद मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच कर सकती हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल कम्युनिकेशन से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
ग्रेटर नोएडा में पहले भी सामने आ चुके हैं ड्रग्स के मामले
ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में इससे पहले भी विदेशी नागरिकों से जुड़े कथित ड्रग्स नेटवर्क और अवैध ड्रग्स फैक्ट्रियों के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 में भी ग्रेटर नोएडा में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली कथित फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। उस दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा था।
इसी पृष्ठभूमि में ताजा कार्रवाई को भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, हर मामले में आरोपियों की भूमिका और बरामद पदार्थ की अंतिम कानूनी स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होती है।
ड्रग नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाना है। अधिकारियों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि ड्रग्स किस स्रोत से आई, इसे किसने उपलब्ध कराया और ग्रेटर नोएडा में इसकी सप्लाई के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
इसके अलावा एजेंसियां यह भी जांच सकती हैं कि गिरफ्तार महिलाओं के बैंक लेनदेन, मोबाइल संपर्क और अन्य डिजिटल गतिविधियों में किसी संदिग्ध व्यक्ति या संगठन का कनेक्शन सामने आता है या नहीं।
कई सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे
करीब 5.40 करोड़ रुपये मूल्य की कथित ड्रग्स बरामदगी के बाद कई सवाल खड़े हुए हैं। क्या यह खेप ग्रेटर नोएडा में ही तैयार की गई थी या बाहर से लाई गई थी? इसका अंतिम गंतव्य कहां था? इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं? क्या गिरफ्तार महिलाओं के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था?
इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में किराये के फ्लैट और बहुमंजिला सोसाइटियों का इस्तेमाल कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा सत्यापन अभियान को मजबूत करना जरूरी है। वहीं आम लोगों से भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित एजेंसियों को देने की अपील की जाती रही है।
नोट: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और साझा किए गए समाचार पोस्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।