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महुआ को हटाने की कोशिश पर थरूर का हमला, बोले सुरक्षा देना जिम्मेदारी

नयी दिल्ली:  पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। नादिया जिला प्रशासन पर आरोप है कि कृष्णानगर स्थित सर्किट हाउस से महुआ मोइत्रा को देर रात हटाने या कमरा खाली कराने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने […]

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  • August 16, 2026 3:40 pm IST, Published 8 hours ago

नयी दिल्ली:  पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। नादिया जिला प्रशासन पर आरोप है कि कृष्णानगर स्थित सर्किट हाउस से महुआ मोइत्रा को देर रात हटाने या कमरा खाली कराने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने महुआ मोइत्रा के समर्थन में आवाज उठाते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

शशि थरूर ने कहा कि यदि किसी सांसद को भीड़ या किसी संभावित खतरे का सामना करना पड़ रहा है तो प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में किसी जनप्रतिनिधि को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के बजाय उससे कमरा खाली कराने की कोशिश क्यों की जा रही है।

शशि थरूर ने सोशल मीडिया के जरिए इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित सांसद की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी सांसद के खिलाफ भीड़ का खतरा मौजूद है तो प्रशासन को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए, न कि ऐसी परिस्थिति में आवास या कमरे को लेकर दबाव बनाना चाहिए। कांग्रेस नेता की इस टिप्पणी को विपक्ष की ओर से महुआ मोइत्रा के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी विपक्षी दल कई मौकों पर जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

विवाद का केंद्र कृष्णानगर सर्किट हाउस बना हुआ है। आरोप है कि नादिया जिला प्रशासन की ओर से महुआ मोइत्रा को रात के समय परिसर खाली करने के लिए कहा गया या उन्हें हटाने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम की वजह और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। मामले की पूरी तस्वीर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

महुआ मोइत्रा के समर्थकों का कहना है कि यदि वह किसी तनावपूर्ण परिस्थिति में थीं, तो प्रशासन को उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए थी। वहीं प्रशासनिक स्तर पर सर्किट हाउस के कमरों के आवंटन, नियमों या अन्य व्यवस्थागत कारणों को लेकर कोई अलग स्थिति हो सकती है। इसलिए इस विवाद में आरोप और प्रशासनिक पक्ष दोनों को देखना जरूरी है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर निर्वाचित प्रतिनिधियों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। सांसदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान सुरक्षा मुहैया कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। वहीं सरकारी आवास या सर्किट हाउस जैसे स्थानों के उपयोग के लिए भी निर्धारित नियम होते हैं।शशि थरूर ने अपने बयान में इसी संतुलन को लेकर सरकार की प्राथमिकता पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि यदि खतरा वास्तविक था तो प्रशासन को सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए था। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस मामले पर चर्चा तेज हो गई है।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। पार्टी इसे प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के मुद्दे के रूप में उठा सकती है। दूसरी ओर, सरकार या जिला प्रशासन की ओर से यदि कोई स्पष्टीकरण आता है तो उससे यह स्पष्ट हो सकता है कि सर्किट हाउस से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक वजह क्या थी। कृष्णानगर सर्किट हाउस का यह मामला भी अब केवल स्थानीय प्रशासन से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि विपक्षी राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है।

फिलहाल इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि सर्किट हाउस खाली कराने की कथित कोशिश किस परिस्थिति में की गई और क्या उस समय सांसद की सुरक्षा को लेकर कोई वास्तविक खतरा मौजूद था।  शशि थरूर के समर्थन ने इस विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि नादिया जिला प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है ।

 

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