नयी दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड की चर्चित अंकिता भंडारी हत्या मामले को लेकर राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने दो दिन पहले अंकिता भंडारी के परिवार से मुलाकात की और परिवार चार साल बाद भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने मामले में कथित ‘VIP’ की पहचान सार्वजनिक किए जाने और जांच को लेकर उठे सवालों का जवाब देने की मांग की।
राहुल गांधी के अनुसार, अंकिता भंडारी बेहद कम उम्र में वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। मामले की जांच के दौरान सामने आए आरोपों के मुताबिक, अंकिता पर एक प्रभावशाली मेहमान की कथित अनुचित मांग मानने का दबाव था और विरोध करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि अंकिता की मौत के मामले में परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। उन्होंने कहा कि इस घटना में सामने आए तथ्यों और आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से बचने का अवसर न मिले।
अंकिता भंडारी का शव चीला नहर से बरामद हुआ था। मामले की जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया। राहुल गांधी ने दावा किया कि पोस्टमार्टम में हिंसा और डूबने से जुड़े संकेत सामने आए थे। हालांकि, मामले से संबंधित किसी भी निष्कर्ष को न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक जांच के आधार पर ही अंतिम रूप दिया जा सकता है राहुल गांधी ने वनंतरा रिजॉर्ट से जुड़े एक और मुद्दे को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता के कमरे को जांच पूरी होने से पहले ही ध्वस्त कर दिया गया था। कांग्रेस नेता ने इस कार्रवाई को संदिग्ध बताते हुए सवाल किया कि जब मामला जांच के दायरे में था, तब घटनास्थल से जुड़े संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने कथित ‘VIP’ की पहचान को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक उस व्यक्ति का नाम सामने नहीं ला सकी है और इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण की आशंका जताई। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए किसी आधिकारिक निष्कर्ष का सामने आना जरूरी है।
अंकिता भंडारी के परिवार से 2 दिन पहले मिला। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वो न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं – अपनी बच्ची के ख़िलाफ़ एक ऐसे अपराध के लिए जिसकी कोई माफी नहीं।
सिर्फ 19 साल की अंकिता वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं जहां एक “VIP” मेहमान की शर्मनाक मांग का विरोध… pic.twitter.com/qYN1gIKbmI
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 15, 2026
अंकिता भंडारी मामले में मुख्य आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और अदालत द्वारा इस मामले में सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद कथित ‘VIP’ की पहचान और भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है। राहुल गांधी ने अपने बयान में भाजपा और आरएसएस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों को बचाने की संस्कृति महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और न्याय मिलना जरूरी है। राहुल गांधी ने महिलाओं को केवल किसी की इच्छा या इस्तेमाल की वस्तु समझने वाली मानसिकता के खिलाफ सामाजिक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। कांग्रेस लंबे समय से अंकिता भंडारी मामले में कथित ‘VIP’ की पहचान को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। दूसरी ओर, सरकार और भाजपा का पक्ष इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों पर आधारित रहा है।
अंकिता भंडारी की हत्या को उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना जाता है। उनकी मौत के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था। परिवार और सामाजिक संगठनों की ओर से लंबे समय तक न्याय और जवाबदेही की मांग की जाती रही। अब राहुल गांधी की ताजा टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि कथित ‘VIP’ की भूमिका को लेकर जांच में क्या निष्कर्ष निकला और क्या उससे जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक किए गए हैं। इस मामले में आगे किसी भी दावे का महत्व आधिकारिक दस्तावेजों, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत के निष्कर्षों से तय होगा।
फिलहाल राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के परिवार के साथ मुलाकात का हवाला देते हुए न्याय की मांग दोहराई है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को राजनीतिक और सामाजिक प्राथमिकता बनाने की जरूरत बताई। उनके बयान ने एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड, कथित ‘VIP’ और जांच प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।