अहमदाबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घर और व्यावसायिक संपत्ति खरीदने वाले लोगों को रियल एस्टेट सौदों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा है कि यदि कोई बिल्डर परियोजना का रेरा पंजीकरण छिपाता है या ग्राहक से नकद भुगतान में सौदा करने की मांग करता है, तो इसकी तुरंत संबंधित एजेंसियों को शिकायत करनी चाहिए। ईडी की यह चेतावनी अहमदाबाद की एक रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई के बाद सामने आई है।
ED के अनुसार, केशव नारायण ग्रुप और उसके प्रमोटरों रौनक रावजीभाई सोनानी तथा विपुलभाई गोवर्धनभाई गंगानी के खिलाफ लोगों को कथित तौर पर ठगने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसी ने अहमदाबाद पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर धन शोधन निवारण कानून यानी पीएमएलए के तहत कार्रवाई की।
एजेंसी ने करीब 129.80 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क कीं। ED की कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है। एजेंसी ने संभावित खरीदारों से कहा है कि वे किसी भी परियोजना में पैसा लगाने से पहले जरूरी दस्तावेजों और नियामकीय मंजूरियों की जांच करें।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसी परियोजनाओं के जरिए मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे निवेशकों को आकर्षित किया, जिनके लिए आवश्यक मंजूरियां उपलब्ध नहीं थीं। आरोप है कि ग्राहकों को बेहतर रिटर्न का भरोसा देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। ED के अनुसार, कथित योजनाओं में निवेश पर 54 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया गया था।
मामले में एक महत्वपूर्ण आरोप यह भी है कि संबंधित लोग बिना रेरा पंजीकरण के फ्लैट और दुकानों की बिक्री कर रहे थे। रियल एस्टेट क्षेत्र में रेरा पंजीकरण खरीदारों के हितों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण नियामकीय पहलू है। ऐसे में किसी परियोजना की वैधता और पंजीकरण की स्थिति की जांच किए बिना बड़ी रकम निवेश करना खरीदारों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
ED की कार्रवाई के बाद एजेंसी ने ग्राहकों को विशेष रूप से कैश डील से सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि कोई बिल्डर या एजेंट दस्तावेजों में लेनदेन दिखाने से बचने के लिए नकद भुगतान पर जोर देता है, तो खरीदारों को ऐसे सौदे से पहले उसकी वैधता की जांच करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देना निवेशकों के हित में हो सकता है।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, कथित फर्जी या बिना मंजूरी वाली योजनाओं के जरिए निवेशकों से धन जुटाया गया। ऐसे मामलों में आम तौर पर छोटे निवेशक सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे अपनी बचत का बड़ा हिस्सा घर, दुकान या निवेश के उद्देश्य से लगाते हैं। यदि परियोजना कानूनी विवाद में फंस जाती है या आवश्यक मंजूरियां नहीं होतीं, तो खरीदारों के लिए पैसा वापस पाना मुश्किल हो सकता है।
संपत्ति खरीदने से पहले खरीदारों को परियोजना से जुड़े दस्तावेज, रेरा पंजीकरण, जमीन के अधिकार, आवश्यक सरकारी मंजूरियां और भुगतान की शर्तें जांचनी चाहिए। किसी भी वादे या आकर्षक रिटर्न के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना जरूरी है।
फिलहाल इस मामले के जरिए ED ने रियल एस्टेट खरीदारों को स्पष्ट संदेश दिया है कि संपत्ति खरीदते समय सिर्फ कीमत या रिटर्न पर ध्यान न दें, बल्कि परियोजना की कानूनी स्थिति और नियामकीय मंजूरियों की भी पूरी जांच करें। खासकर रेरा पंजीकरण छिपाने या नकद लेनदेन पर जोर देने वाले बिल्डरों से सावधानी बरतना जरूरी है।