• होम
  • देश
  • भद्रक-हरिदासपुर रेल कॉरिडोर का विस्तार तेज

भद्रक-हरिदासपुर रेल कॉरिडोर का विस्तार तेज

नयी दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भद्रक-हरिदासपुर रेल कॉरिडोर से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि करीब 75 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर तीसरी लाइन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई हिस्सों में यह पूरा भी हो चुका है। भविष्य […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 19, 2026 4:45 pm IST, Published 36 minutes ago

नयी दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भद्रक-हरिदासपुर रेल कॉरिडोर से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि करीब 75 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर तीसरी लाइन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई हिस्सों में यह पूरा भी हो चुका है। भविष्य में इस मार्ग पर चौथी लाइन विकसित करने की योजना भी है। सरकार का उद्देश्य इस पूरे कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाकर माल और यात्री परिवहन को अधिक सुचारु बनाना है।

वैष्णव के मुताबिक भद्रक और हरिदासपुर के बीच रेल नेटवर्क का विस्तार ओडिशा के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह कॉरिडोर बिजली उत्पादन और विभिन्न उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल की आवाजाही में अहम भूमिका निभाता है। खासतौर पर कोयला, स्टील, लौह अयस्क और चूना पत्थर जैसे खनिजों की ढुलाई के लिए इसकी क्षमता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।

रेल लाइन के विस्तार से मालगाड़ियों की आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में कई औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी मात्रा में कच्चे माल और तैयार उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए रेलवे पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त रेल लाइन बनने से मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम किया जा सकेगा और ट्रेनों के संचालन में बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण लाभ कटक क्षेत्र में दिखाई देगा। अतिरिक्त रेल लाइन विकसित होने से इस इलाके में ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इससे रेल यातायात की भीड़ कम होने और परिचालन क्षमता बढ़ने की संभावना है। यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सकेगा।

परियोजना के तहत केवल रेल पटरियों का विस्तार ही नहीं किया जा रहा, बल्कि बड़े पैमाने पर पुल और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण भी प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, इसमें 18 बड़े और 106 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क यातायात को सुगम बनाने के लिए कई रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज भी तैयार किए जाएंगे। इन निर्माण कार्यों का उद्देश्य रेल और सड़क यातायात के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

सरकार के अनुसार, परियोजना पर करीब 1,583 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इतनी बड़ी राशि से विकसित होने वाला यह रेल ढांचा क्षेत्र में परिवहन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती दे सकता है। बेहतर रेल संपर्क से माल ढुलाई का समय कम होने और लॉजिस्टिक लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भद्रक-हरिदासपुर मार्ग ओडिशा के उन हिस्सों को जोड़ता है जहां उद्योग, खनिज और ऊर्जा से जुड़े कारोबार का महत्वपूर्ण आधार मौजूद है। ऐसे में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना राज्य के आर्थिक विकास के लिए भी उपयोगी हो सकता है। मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से औद्योगिक इकाइयों तक आवश्यक सामग्री की आपूर्ति अधिक नियमित हो सकती है।

परियोजना के पूरा होने के बाद रेलवे के सामने एक साथ कई उद्देश्यों को हासिल करने का अवसर होगा। एक तरफ माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ यात्री ट्रेनों के लिए भी बेहतर परिचालन व्यवस्था तैयार की जा सकेगी। पुलों, आरओबी और आरयूबी के निर्माण से सड़क यातायात को भी लाभ मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, भद्रक-हरिदासपुर रेल कॉरिडोर का विस्तार ओडिशा में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तीसरी लाइन के निर्माण और प्रस्तावित चौथी लाइन के साथ यह मार्ग भविष्य में बढ़ती माल ढुलाई और यात्री यातायात की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। परियोजना के जरिए रेलवे क्षमता बढ़ाने के साथ औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने और परिवहन व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

 

 

Advertisement