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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 56 नए सिविल जजों को पहली पोस्टिंग दी

बिलासपुर:  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पीएससी के माध्यम से चयनित 56 नए सिविल जजों को पहली पदस्थापना दी है। इसके साथ ही हायर ज्यूडिशियल सर्विस और लोअर ज्यूडिशियल सर्विस के कई न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई जिम्मेदारियों से जुड़े आदेश भी जारी किए गए हैं। नए […]

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  • August 20, 2026 6:20 pm IST, Published 2 minutes ago

बिलासपुर:  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पीएससी के माध्यम से चयनित 56 नए सिविल जजों को पहली पदस्थापना दी है। इसके साथ ही हायर ज्यूडिशियल सर्विस और लोअर ज्यूडिशियल सर्विस के कई न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई जिम्मेदारियों से जुड़े आदेश भी जारी किए गए हैं। नए अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में अपनी नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव की ओर से जारी विभिन्न आदेशों के अनुसार, प्रोबेशन पर नियुक्त 56 सिविल जजों (जूनियर डिवीजन) को राज्य के अलग-अलग न्यायिक संस्थानों में पहली पोस्टिंग दी गई है। सभी नव नियुक्त अधिकारियों को 29 अगस्त तक अपने पदस्थापन स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करना होगा।

न्यायिक अधिकारियों के इस फेरबदल में हायर ज्यूडिशियल सर्विस के पांच अधिकारियों का तबादला भी शामिल है। दंतेवाड़ा परिवार न्यायालय में पदस्थ हरीश कुमार अवस्थी को रायपुर में प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, ममता पटेल को अंबिकापुर से स्थानांतरित कर बिलासपुर में द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। इसी क्रम में ज्योति अग्रवाल का तबादला पेंड्रारोड से राजनांदगांव किया गया है। उन्हें वहां न्यायाधीश के रूप में पदस्थ किया गया है। नमिता मिंज भास्कर और अन्य न्यायिक अधिकारियों के लिए भी नई पदस्थापना से जुड़े आदेश जारी किए गए हैं।

राजनांदगांव में पदस्थ न सिंह साहू को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) दंतेवाड़ा की जिम्मेदारी दी गई है।रायपुर न्यायिक व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। रायपुर के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की विशेष अदालत में विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इससे संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक व्यवस्था को नई जिम्मेदारी के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

अंबिकापुर में कमलेश जगदल्ला को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है, जबकि स्मिता रत्नावत को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पॉक्सो से जुड़े मामलों की सुनवाई बच्चों से संबंधित संवेदनशील मामलों के कारण महत्वपूर्ण मानी जाती है। सिविल जज सीनियर डिवीजन संवर्ग में भी कई अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। सतीश कुमार खाखा को प्रतापपुर से स्थानांतरित कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और प्रथम सिविल जज सीनियर डिवीजन, मुंगेली नियुक्त किया गया है। भगवान दास पनिका को प्रतापपुर, श्वेता पटेल को छुईखदान, ईशान व्यास को दुर्ग और नीलेश जगदल्ला को राजनांदगांव में पदस्थ किया गया है।

इसके अलावा दुर्ग के द्वितीय अतिरिक्त जज रवि कुमार कश्यप को प्रतिनियुक्ति पर हाई कोर्ट में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी यानी ओएसडी बनाया गया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन संवर्ग में भी सात न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।नए सिविल जजों की नियुक्ति और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के तबादलों को न्यायिक प्रशासन को अधिक व्यवस्थित बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

अलग-अलग जिलों और न्यायालयों में अधिकारियों की उपलब्धता के अनुसार जिम्मेदारियां तय किए जाने से मामलों की सुनवाई और प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।अब सभी 56 नव नियुक्त सिविल जजों के सामने अपनी पहली न्यायिक जिम्मेदारी संभालने की चुनौती होगी। 29 अगस्त तक कार्यभार ग्रहण करने के बाद वे संबंधित जिलों और न्यायालयों में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। हाई कोर्ट के इन आदेशों से राज्य के विभिन्न स्तरों के न्यायालयों में अधिकारियों की नई तैनाती का रास्ता साफ हो गया है।

 

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