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छात्रों की आवाज दबा नहीं सकती सरकार, प्रशांत किशोर ने प्रशासन को घेरा

पटना: बिहार में छात्रों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में देशभर में युवाओं के आंदोलनों […]

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  • August 25, 2026 7:45 pm IST, Published 1 hour ago

पटना: बिहार में छात्रों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में देशभर में युवाओं के आंदोलनों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को सामने रखा है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जब भी किसी मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए, वहां पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रशासन किसी भी तरह की कार्रवाई करने से पहले पहले की तुलना में अधिक सावधानी बरत रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र में जनता और युवाओं की बढ़ती भूमिका का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि देशभर में युवा अपने मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और इसका प्रभाव राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर दिखाई दे रहा है। प्रशांत किशोर के मुताबिक, लोकतंत्र में जनता को अपनी बात रखने का अधिकार है और छात्रों की समस्याओं को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का समाधान बातचीत और संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

बिहार में छात्रों का विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से भर्ती प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सामने आया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और सरकार से नियमों में बदलाव तथा परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि छात्रों की मांगें उचित हैं तो सरकार को उन्हें स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए छात्रों की आवाज को समाप्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, युवा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण ताकत होते हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना लंबे समय में व्यवस्था के लिए ठीक नहीं होगा।

उन्होंने बिहार में पिछले वर्षों के आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर काफी चर्चा होती थी। अब प्रशासन किसी भी कदम से पहले स्थिति का आकलन कर रहा है। प्रशांत किशोर ने इसे लोकतंत्र के प्रभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को जनता की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लेना पड़ रहा है।

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि छात्रों की मांगों को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उनके भविष्य से जुड़े मुद्दे के रूप में समझने की जरूरत है। प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले हजारों युवा लंबे समय तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया, परिणाम और नियुक्ति से संबंधित किसी भी समस्या का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की जाए और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए। इससे आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है। उनका मानना है कि संवाद की प्रक्रिया जितनी जल्दी शुरू होगी, उतना ही बेहतर माहौल बनाया जा सकेगा।

प्रशांत किशोर के बयान के बाद बिहार में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। एक ओर सरकार और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर विचार करना भी जरूरी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार का रुख और छात्रों के साथ बातचीत की दिशा महत्वपूर्ण रहेगी। कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर ने छात्रों के विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार से जोड़ते हुए सरकार से उनकी जायज मांगों पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है।

 

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