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सेमीकंडक्टर और एआई में निवेश बढ़ाएगा जापान

भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं निवेश संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों से भारत में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। टोक्यो में हुई एक अहम बैठक में दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह, निवेश के नए अवसर […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 25, 2026 6:55 pm IST, Published 53 minutes ago

भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं निवेश संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों से भारत में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। टोक्यो में हुई एक अहम बैठक में दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह, निवेश के नए अवसर और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में जापान के प्रमुख वित्तीय और निवेश संस्थानों एमयूएफजी, डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान (डीबीजे), मिजुहो, मॉर्गन स्टेनली, नोमुरा और निप्पॉन लाइफ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र भारत की आर्थिक संभावनाएं और जापानी संस्थागत निवेशकों के लिए उपलब्ध नए अवसर रहे।

पीयूष गोयल ने बैठक में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेज विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर स्थिति, मजबूत पूंजी आधार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के नियंत्रित स्तर, बढ़ते मध्यम वर्ग और लोगों की बढ़ती आय को आर्थिक विकास के प्रमुख आधारों के रूप में पेश किया।

मंत्री ने जापानी निवेशकों को भारत के तेजी से उभरते क्षेत्रों में भागीदारी का अवसर भी बताया। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा क्षमता और मजबूत बिजली नेटवर्क ऊर्जा की अधिक आवश्यकता वाले डिजिटल उद्योगों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं।

भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयासों का भी बैठक में उल्लेख हुआ। सरकार का लक्ष्य देश में तकनीक आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करना है। ऐसे में जापानी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए भारत में दीर्घकालिक निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

बैठक के दौरान जापानी संस्थानों ने भी भारत के प्रति अपने भरोसे और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को साझा किया। एमयूएफजी ने भारत में श्रीराम फाइनेंस में अपने बड़े निवेश तथा नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में रुचि का उल्लेख किया। डीबीजे ने भारत के लिए अपनी विशेष निवेश रणनीति और संपत्ति विकास, वेंचर कैपिटल तथा अन्य दीर्घकालिक परियोजनाओं में संभावनाओं पर बात की।

मिजुहो ने भारत में जापानी कंपनियों के बढ़ते कारोबार और अपने संचालन के विस्तार की जानकारी दी। वहीं मॉर्गन स्टेनली ने भारत को अपने महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्रों में शामिल बताया और देश में बड़े स्तर पर रोजगार तथा वित्तीय गतिविधियों का उल्लेख किया। नोमुरा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भारत की क्षमता पर भरोसा जताया।

निप्पॉन लाइफ ने भी भारत में स्थिर और दीर्घकालिक पूंजी के महत्व को रेखांकित किया। जापानी संस्थानों ने यह संकेत दिया कि भारत की विकास क्षमता को लेकर उनका नजरिया सकारात्मक है, हालांकि मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कुछ नियामकीय पहलुओं को निवेश निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

बैठक में भारत में जापानी पूंजी के प्रवाह को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई। निवेशकों ने लाभ को देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया को सरल बनाने, भारतीय पूंजी बाजारों तक पहुंच बेहतर करने और नियमों में अधिक स्पष्टता लाने की जरूरत बताई। इसके जवाब में पीयूष गोयल ने कारोबार और निवेश का वातावरण लगातार बेहतर बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने में गुजरात स्थित GIFT City की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इसे अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जापानी निवेशकों के लिए भी यह भारत और जापान के बीच सीमा पार निवेश को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत जापान से केवल पूंजी निवेश नहीं चाहता, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक साझेदारी चाहता है जिससे तकनीक, नवाचार, विनिर्माण, रोजगार और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी मजबूत हो। उन्होंने पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

भारत और जापान के बीच अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निजी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में टोक्यो में हुई यह बैठक दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भारत में जापानी संस्थागत पूंजी, तकनीक और कारोबारी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को बल मिल सकता है।

 

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