इंदौर एक्सप्रेस में 78 साल के यात्री की नाक पर चूहे ने काटा

इंदौर। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इंदौर से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां उज्जैन-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे 78 वर्षीय यात्री को सोते समय चूहे ने नाक पर काट लिया। घटना […]

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  • August 25, 2026 8:00 pm IST, Published 35 minutes ago

इंदौर। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इंदौर से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां उज्जैन-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे 78 वर्षीय यात्री को सोते समय चूहे ने नाक पर काट लिया। घटना के बाद बुजुर्ग यात्री की तबीयत को लेकर परिजन चिंतित हो गए और इंदौर पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक अधिकारी इस घटना के संबंध में जानकारी देते दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट के मुताबिक घटना रविवार रात की बताई जा रही है। बुजुर्ग यात्री ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे थे। रात में जब वे सो रहे थे, उसी दौरान चूहे ने उनकी नाक के पास काट लिया। अचानक हुए इस हमले से उनकी नींद खुल गई और कोच में हड़कंप की स्थिति बन गई।

सोते समय अचानक हुआ चूहे का हमला

जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग यात्री ट्रेन में सफर के दौरान सो रहे थे। इसी दौरान चूहे ने उनकी नाक पर काट लिया। चूहे के काटने से उन्हें चोट लगी और घटना के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई। ट्रेन में मौजूद यात्रियों को जब घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने भी चिंता जताई।

ट्रेन के एसी कोच में चूहे के पहुंचने की घटना ने यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर फर्स्ट एसी कोच को ट्रेन का अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहतर सुविधा वाला हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इसी कोच में चूहे के काटने की घटना सामने आने के बाद रेलवे की साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है।

इंदौर पहुंचने पर अस्पताल ले गए परिजन

घटना के बाद बुजुर्ग यात्री के परिजन उन्हें इंदौर पहुंचने पर कोकिलाबेन अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी चोट की जांच की और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेबीज से बचाव के लिए पहला इंजेक्शन लगाया गया।

चूहे के काटने की स्थिति में संक्रमण की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों से उपचार लेना जरूरी माना जाता है। यही वजह रही कि परिजनों ने ट्रेन यात्रा खत्म होने के बाद बिना देरी किए बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया।

बताया गया है कि डॉक्टरों ने उनकी स्थिति का परीक्षण किया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की। घटना के बाद परिवार की ओर से भी ट्रेन में साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठना स्वाभाविक है।

फर्स्ट एसी कोच में चूहे की मौजूदगी ने उठाए सवाल

इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि चूहे ने जिस यात्री को काटा, वह फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे थे। फर्स्ट एसी कोच में यात्रियों से अपेक्षा रहती है कि उन्हें बेहतर साफ-सफाई और सुविधाएं मिलेंगी। ऐसे में चूहे की मौजूदगी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

ट्रेन में चूहों की समस्या नई नहीं है। कई बार यात्रियों की ओर से ट्रेन के अंदर चूहों और अन्य जीव-जंतुओं की मौजूदगी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, किसी यात्री को सोते समय चूहे द्वारा काटे जाने की घटना निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है।

यात्रियों का कहना है कि रेलवे को कोच की नियमित सफाई के साथ-साथ चूहों की रोकथाम के लिए प्रभावी पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित निगरानी जरूरी है।

यात्रियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

रेल यात्रा के दौरान यात्री कई घंटे कोच के अंदर बिताते हैं। रात के समय यात्री सोते हैं और उस दौरान उन्हें उम्मीद रहती है कि उनका सफर सुरक्षित रहेगा। ऐसे में किसी यात्री के सोते समय चूहे द्वारा काटे जाने की घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा करती है।

फर्स्ट एसी कोच में हुई इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चूहा कोच के अंदर कैसे पहुंचा और क्या यात्रा से पहले कोच की पर्याप्त जांच और सफाई की गई थी। यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ऐसे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।

घटना के बाद रेलवे की व्यवस्था पर नजर

घटना सामने आने के बाद रेलवे की साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर नजर टिक गई है। यात्रियों के लिए यह जरूरी है कि ट्रेन के अंदर खाद्य सामग्री या कचरे का उचित प्रबंधन हो, क्योंकि इससे चूहों की समस्या बढ़ सकती है।

रेलवे की ओर से नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और पेस्ट कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसी घटनाओं के बाद व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरूरत और बढ़ जाती है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग यात्री को अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया है और डॉक्टरों ने उन्हें रेबीज से बचाव का पहला इंजेक्शन दिया है। घटना ने ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है।

यात्रियों के लिए बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक यात्री के साथ हुई परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रेन के अंदर स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि फर्स्ट एसी जैसे कोच में भी चूहों की मौजूदगी यात्रियों के लिए खतरा बन सकती है, तो रेलवे को इस दिशा में और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

फिलहाल बुजुर्ग यात्री के उपचार के बाद उनकी स्थिति और आगे के चिकित्सकीय परामर्श पर परिजनों की नजर है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि ट्रेन के अंदर यात्रियों को चूहों जैसी समस्या से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए रेलवे की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

नोट: यह खबर उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट/दिए गए स्क्रीनशॉट में मौजूद जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े अतिरिक्त आधिकारिक विवरण सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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