नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने के आंकड़ों ने जहां सत्तारूढ़ एनडीए को सरकार की आर्थिक नीतियों की सफलता बताने का मौका दिया है, वहीं विपक्ष ने इन आंकड़ों की व्याख्या और अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने देश की लोकतांत्रिक स्थिति से जुड़ा एक आंकड़ा साझा कर केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा है।
चिदंबरम ने V-Dem के इलेक्टोरल डेमोक्रेसी इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि भारत का स्कोर 1975 के बाद के दौर में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इंडेक्स से जुड़ा आंकड़ा साझा किया, हालांकि इसके साथ अपनी ओर से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। उनके इस पोस्ट को केंद्र सरकार के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर विपक्ष की चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं, 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर जारी युद्धों, अस्थिरता और सप्लाई चेन पर पड़े दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने देश के भीतर नकारात्मक माहौल बनाने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की है।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अपनी जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने अनावश्यक विदेशी यात्राओं और विदेशों में होने वाले बड़े आयोजनों पर खर्च को लेकर भी लोगों को सोचने की सलाह दी।
Without comment:
India ranks 106th among 179 countries on the Electoral Democracy Index
V-Dem’s democracy index score for India is at its lowest since 1975
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) September 1, 2026
मोदी ने ‘मेड इन इंडिया’ को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की बात कही और कहा कि भारत जितना अधिक आत्मनिर्भर बनेगा, उतना ही मजबूत आर्थिक आधार तैयार होगा। उनका कहना है कि विकास की मौजूदा गति को बरकरार रखते हुए देश को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाना है।
हालांकि कांग्रेस ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर अलग तस्वीर पेश की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल तिमाही वृद्धि दर के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, मौजूदा आंकड़े निजी निवेश और अर्थव्यवस्था में कारोबारी धारणा की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखते। रमेश ने उपभोक्ता विश्वास में कमजोरी का भी मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि महामारी के बाद से उपभोक्ता धारणा कमजोर रही है और हाल के महीनों में इसमें और गिरावट देखने को मिली है। कांग्रेस नेता ने घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतों का दबाव और शिक्षित युवाओं के बीच बेरोजगारी को भी आर्थिक चुनौती के तौर पर सामने रखा।
इसके अलावा जयराम रमेश ने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चुनिंदा बड़े कारोबारी समूहों का बढ़ता प्रभाव भी चिंता का विषय है। कांग्रेस का तर्क है कि आर्थिक विकास का मूल्यांकन सिर्फ जीडीपी की एक तिमाही की वृद्धि दर से नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, उपभोग, महंगाई और व्यापार संतुलन जैसे कई संकेतकों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इस तरह एक ओर सरकार 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसके पीछे छिपी आर्थिक चुनौतियों को सामने ला रहा है। जीडीपी के आंकड़ों के साथ चिदंबरम द्वारा लोकतंत्र सूचकांक का मुद्दा उठाए जाने से राजनीतिक बहस का दायरा भी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंच गया है।