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11 साल से बाल खाने की आदत, पेट से निकला 1.16 किलो का गुच्छा

नई दिल्ली/द्वारका। राजधानी के द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 20 वर्षीय छात्रा की जटिल सर्जरी कर उसके पेट से करीब 1.16 किलोग्राम वजन का बालों का गुच्छा निकाला। लंबे समय से अपने ही बाल खाने की आदत के कारण युवती के पेट में बाल लगातार जमा होते रहे और धीरे-धीरे उनका आकार […]

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  • September 6, 2026 11:47 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली/द्वारका। राजधानी के द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 20 वर्षीय छात्रा की जटिल सर्जरी कर उसके पेट से करीब 1.16 किलोग्राम वजन का बालों का गुच्छा निकाला। लंबे समय से अपने ही बाल खाने की आदत के कारण युवती के पेट में बाल लगातार जमा होते रहे और धीरे-धीरे उनका आकार इतना बढ़ गया कि वे पेट के बड़े हिस्से में फैल गए।

यह मामला न केवल चिकित्सकीय रूप से बेहद असामान्य है, बल्कि यह भी बताता है कि लंबे समय तक रहने वाली कुछ आदतों को नजरअंदाज करना कितना गंभीर परिणाम दे सकता है।

11 साल से बाल खाने की आदत ने बढ़ाई परेशानी

जानकारी के अनुसार, युवती पिछले करीब 11 वर्षों से अपने ही बाल खाने की आदत से परेशान थी। शुरुआत में यह आदत सामान्य लग सकती थी, लेकिन समय के साथ निगले गए बाल उसके पाचन तंत्र में जमा होते गए।

मानव शरीर बालों को सामान्य भोजन की तरह पचा नहीं पाता। ऐसे में लंबे समय तक निगले गए बाल पेट में इकट्ठा होकर एक ठोस पिंड का रूप ले सकते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ट्राइकोफेजिया से जोड़ा जाता है, जबकि पेट में जमा बालों के गुच्छे को आमतौर पर हेयरबॉल या ट्राइकोबेज़ार कहा जाता है।

तीन दिन से पेट दर्द और उल्टी की शिकायत

अस्पताल पहुंचने से पहले युवती को करीब तीन दिनों से पेट में तेज दर्द, जी मिचलाने और उल्टी जैसी शिकायतें हो रही थीं। इसके साथ ही लंबे समय से उसे भूख कम लगने, वजन घटने और कमजोरी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था।

जांच के दौरान चिकित्सकों ने पेट के ऊपरी हिस्से में एक कड़ी गांठ महसूस की। इसके बाद आगे की जांच की गई, जिसमें पेट के अंदर बड़ी मात्रा में बाल जमा होने की स्थिति सामने आई।

डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस विशाल हेयरबॉल को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना था।

पेट में बन चुका था बालों का बड़ा ठोस गोला

चिकित्सकों के मुताबिक, युवती द्वारा वर्षों से निगले गए बाल पेट में जमा होते रहे। भोजन के छोटे-छोटे कण भी बालों के बीच फंसते गए और समय के साथ यह सामग्री एक बड़े एवं ठोस पिंड में बदल गई।

इसका आकार इतना बढ़ गया था कि पेट के भीतर उपलब्ध जगह काफी कम हो गई थी। इसी वजह से युवती को खाना खाने में परेशानी, भूख कम लगना और वजन से जुड़ी समस्याएं होने लगीं।

ऐसे मामलों में यदि समय पर इलाज न मिले तो पेट की अंदरूनी परत को नुकसान, पाचन तंत्र में रुकावट और अन्य गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

एंडोस्कोपी से निकालना आसान नहीं था

मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक, जीआई एंड रोबोटिक सर्जरी के चिकित्सकों के अनुसार, शुरुआती तौर पर एंडोस्कोपी के जरिए बालों के इस गुच्छे को छोटे-छोटे हिस्सों में निकालने का प्रयास किया गया।

हालांकि, हेयरबॉल का आकार और घनत्व अधिक होने के कारण इसे पूरी तरह एंडोस्कोपिक तरीके से निकालना संभव नहीं हो सका। इसके बाद चिकित्सकों ने न्यूनतम इनवेसिव यानी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद लेने का निर्णय लिया।

सर्जरी के दौरान पेट में छोटा चीरा लगाकर पूरे बालों के गुच्छे को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। डॉक्टरों के लिए चुनौती यह थी कि बालों के विशाल पिंड को निकालते समय पेट की अंदरूनी परत को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

सर्जरी के बाद तेजी से सुधरी छात्रा की हालत

सर्जरी सफल रहने के बाद युवती की सेहत में तेजी से सुधार देखा गया। बताया गया कि उसकी भूख वापस आने लगी और वजन में भी सुधार हुआ। वह दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू कर चुकी है।

हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि केवल पेट से हेयरबॉल निकाल देना इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है। यदि बाल खाने की आदत के पीछे मौजूद मानसिक या व्यवहार संबंधी कारणों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो समस्या दोबारा सामने आ सकती है।

ट्राइकोफेजिया को लेकर जागरूकता जरूरी

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार अपने बाल खाने या उन्हें निगलने की आदत को सामान्य आदत समझकर छोड़ना उचित नहीं है। कई मामलों में इसके पीछे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कारण हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति में मरीज को शारीरिक उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श और व्यवहार संबंधी सहायता की जरूरत पड़ सकती है। परिवार के लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कई मरीज इस तरह की आदत को छिपाने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक बाल खाने की आदत दिखाई दे और उसके साथ पेट दर्द, उल्टी, भूख कम लगना या वजन कम होने जैसे लक्षण भी मौजूद हों, तो बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

चिकित्सकीय चेतावनी

यह मामला लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि शरीर से जुड़े असामान्य लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर बच्चों और युवाओं में ऐसी आदत दिखाई देने पर परिवार को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

गौरवशाली भारत के पाठकों के लिए यह खबर जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उचित जांच और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

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