• होम
  • देश
  • मोदी-पुतिन बैठक से पहले क्रेमलिन बोला, भारत हमारा बेहद अहम रणनीतिक साझेदार

मोदी-पुतिन बैठक से पहले क्रेमलिन बोला, भारत हमारा बेहद अहम रणनीतिक साझेदार

नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय बातचीत पर दुनिया की नजर रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। रूस ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए भारत को अपना रणनीतिक साझेदार बताया है। पुतिन के […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 8, 2026 4:16 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय बातचीत पर दुनिया की नजर रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। रूस ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए भारत को अपना रणनीतिक साझेदार बताया है। पुतिन के भारत पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को लेकर कई अहम बातें रखीं।

पेस्कोव ने कहा कि मोदी और पुतिन के बीच होने वाली बातचीत दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच करीबी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेता एक-दूसरे के साथ व्यावहारिक और खुले तरीके से बातचीत करते हैं। उनके मुताबिक, वैश्विक घटनाक्रम और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी दोनों पक्ष रचनात्मक चर्चा करने में सक्षम हैं। मोदी और पुतिन की मुलाकात ऐसे समय होने जा रही है, जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, वैश्विक व्यापार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

BRICS की भूमिका को लेकर पेस्कोव ने कहा कि इसे पारंपरिक अर्थों में कोई संगठन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने BRICS को ऐसे देशों का समूह बताया, जो वैश्विक व्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को लेकर कई समान दृष्टिकोण साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस समूह में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, अर्थव्यवस्था एवं वित्त और सांस्कृतिक तथा मानवीय संपर्क तीन प्रमुख क्षेत्र हैं। रूस BRICS के भीतर सहयोग के विस्तार और अधिक देशों को अलग-अलग कार्यसमूहों तथा मंचों से जोड़ने के विचार का समर्थन करता है। पेस्कोव ने BRICS पार्टनर कंट्री व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार 2024 में शुरू की गई इस श्रेणी के तहत कई देशों को भागीदार का दर्जा दिया गया है और उनके प्रतिनिधियों को BRICS के विभिन्न कार्यसमूहों में धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है।

रूस की ओर से BRICS के मंच पर संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार से जुड़े मुद्दों को उठाने की पहल का भी उल्लेख किया गया। पेस्कोव ने कहा कि रियो डी जनेरियो में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान इस विषय पर विशेषज्ञ स्तर की बातचीत शुरू करने की पहल की गई थी और कई देशों ने इसका समर्थन किया। आर्थिक मोर्चे पर पेस्कोव ने रूस और BRICS देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब BRICS देशों में डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर चर्चा जारी है।

भारत के रूस से ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित प्रतिबंधों से जुड़े सवाल पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को रूस की नजर में अवैध बताया। इससे यह संकेत मिलता है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और ऊर्जा व्यापार से जुड़े मुद्दे भी भारत-रूस बातचीत के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण बने हुए हैं। मोदी-पुतिन बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष और शांति प्रयासों का मुद्दा भी चर्चा में आ सकता है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर पेस्कोव ने कहा कि रूस भारतीय प्रयासों का स्वागत करता है।

पेस्कोव ने BRICS को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था से भी जोड़कर देखा। उनके मुताबिक संगठन की मूल सोच एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था से जुड़ी है, जिसमें कई देशों और शक्ति केंद्रों की प्रभावी भूमिका हो। उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान किए गए प्रयासों की भी सराहना की। भारत-रूस संबंधों को लेकर पेस्कोव ने यह भी कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई। इसके अलावा रूस में शिक्षा हासिल कर रहे भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया।

कुल मिलाकर मोदी-पुतिन की प्रस्तावित बैठक ऐसे दौर में हो रही है, जब भारत और रूस के रिश्ते पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर ऊर्जा, परमाणु सहयोग, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक मंचों पर समन्वय जैसे विषयों तक फैल चुके हैं। BRICS सम्मेलन के बीच होने वाली यह बातचीत दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था में उनकी भूमिका के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

 

Advertisement