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मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील से बंगाल में सियासी घमासान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री की कथित अपील अब राजनीतिक विवाद का रूप लेती नजर आ रही है। कांग्रेस की बंगाल इकाई ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उनकी कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का […]

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  • September 10, 2026 9:09 am IST, Published 2 hours ago

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री की कथित अपील अब राजनीतिक विवाद का रूप लेती नजर आ रही है। कांग्रेस की बंगाल इकाई ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उनकी कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने के साथ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से भवानीपुर थाने के प्रभारी अधिकारी को शिकायत दी गई है। शिकायत में धीरेंद्र शास्त्री पर कथित तौर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस ने पुलिस से मामले में प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी सहित प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

दुर्गा पूजा में मांसाहार छोड़ने की कथित अपील

विवाद की शुरुआत धीरेंद्र शास्त्री की कथित उस अपील से हुई, जिसमें उन्होंने बंगाल के लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करने की बात कही थी। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने धार्मिक अवसरों पर मांस खाने वाले लोगों को लेकर टिप्पणी भी की, जिस पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

कांग्रेस का कहना है कि बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खान-पान जैसे व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार को लेकर किसी धार्मिक व्यक्ति की ओर से की गई अपील राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे सकती है।

कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कथित बयान को समाज में अशांति पैदा करने वाला बताया है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार की टिप्पणी लोकतांत्रिक और सामाजिक भावनाओं के खिलाफ जा सकती है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर पुलिस की ओर से अंतिम निष्कर्ष या न्यायिक फैसला सामने आना अभी बाकी है।

कांग्रेस ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद की ओर से दी गई शिकायत में प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में कथित टिप्पणी की जांच करने और कानून के मुताबिक आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान अलग-अलग समुदायों और वर्गों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए धार्मिक मुद्दों पर बयान देते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि धार्मिक आयोजनों, खान-पान और व्यक्तिगत आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक हस्तियों को किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। एक तरफ जहां कांग्रेस ने कथित टिप्पणी को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर इस मामले ने राजनीतिक बयानबाजी को भी हवा दे दी है।

बीजेपी की ओर से आया अलग रुख

विवाद के बीच पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने धीरेंद्र शास्त्री की कथित अपील पर प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मंगलवार को कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार करना अपने आप में कोई विवाद का मुद्दा नहीं है।

दिलीप घोष का यह बयान राजनीतिक विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कांग्रेस के आरोपों और धीरेंद्र शास्त्री की कथित अपील को लेकर अलग राजनीतिक रुख सामने आया है। ऐसे में मामला केवल धार्मिक अपील तक सीमित न रहकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।

बंगाल की राजनीति में क्यों बढ़ा विवाद?

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद व्यापक है। पूजा के दौरान खान-पान की अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। बंगाल में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक अवसरों पर भी मांसाहारी भोजन करते हैं, जबकि कई परिवार धार्मिक मान्यताओं के कारण इन दिनों मांसाहार से दूरी रखते हैं।

यही विविधता इस मुद्दे को संवेदनशील बनाती है। धीरेंद्र शास्त्री की कथित अपील को जहां उनके समर्थक धार्मिक भावना और आस्था से जोड़कर देख सकते हैं, वहीं कांग्रेस ने इसे लोगों की व्यक्तिगत पसंद और सामाजिक सौहार्द से जोड़ते हुए सवाल उठाया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

क्या है आगे की स्थिति?

फिलहाल कांग्रेस की शिकायत के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर सकती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जा सकती है। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक कथित बयान और आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

इस विवाद ने यह भी स्पष्ट किया है कि धार्मिक भावनाओं, व्यक्तिगत खान-पान की पसंद और सार्वजनिक बयानबाजी के बीच संतुलन कितना जरूरी है। दुर्गा पूजा जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के दौरान किसी भी बयान का राजनीतिक असर तेजी से बढ़ सकता है।

फिलहाल बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथित मांसाहार छोड़ने की अपील को लेकर बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज है। कांग्रेस जहां पुलिस कार्रवाई की मांग पर अड़ी है, वहीं बीजेपी की ओर से आया बयान विवाद को एक अलग दिशा देता दिखाई दे रहा है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और राजनीतिक दलों की आगामी प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।

नोट: उपरोक्त समाचार में धीरेंद्र शास्त्री और अन्य नेताओं से संबंधित बातें उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दिए गए दावों/बयानों के आधार पर प्रस्तुत की गई हैं। आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए।

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