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नोएडा PG में आधी रात गिरी छत, लड़की ने सुनाई खौफनाक आपबीती

नोएडा: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने की घटना के बाद देशभर में छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच नोएडा के एक PG में रहने वाली युवती ने आधी रात अपने बाथरूम की छत गिरने की ऐसी आपबीती सुनाई, जिसने PG में रहने वाले […]

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  • September 10, 2026 10:00 am IST, Published 1 hour ago

नोएडा: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने की घटना के बाद देशभर में छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच नोएडा के एक PG में रहने वाली युवती ने आधी रात अपने बाथरूम की छत गिरने की ऐसी आपबीती सुनाई, जिसने PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवती के मुताबिक, हादसा रात करीब 10:30 बजे हुआ। तेज आवाज सुनकर वह और उसकी रूममेट घबरा उठीं। बाद में पता चला कि उनके बाथरूम की छत का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा था।

सोने के करीब एक घंटे बाद आई तेज आवाज

युवती ने बताया कि वह और उसकी रूममेट दिनभर की थकान के बाद सो चुकी थीं। सुबह ड्यूटी पर जाना था, इसलिए दोनों जल्दी सोने की कोशिश कर रही थीं। नींद में जाने के करीब एक घंटे बाद अचानक इतनी तेज आवाज आई कि दोनों की नींद खुल गई।

कुछ पल के लिए उन्हें समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। आवाज इतनी डरावनी थी कि उन्हें किसी बड़े हादसे की आशंका होने लगी। जब उन्होंने आसपास की स्थिति समझने की कोशिश की तो पता चला कि नीचे के फ्लोर से आवाज आ रही थी कि बाथरूम की छत गिर गई है।

सबसे डरावनी बात यह थी कि वह बाथरूम उसी युवती का था। हालांकि हादसे के वक्त वह और उसकी रूममेट बाथरूम के अंदर नहीं थीं। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

अगर उस वक्त बाथरूम में होती तो…’

युवती की आपबीती का सबसे भयावह पहलू यही है कि कुछ मिनटों का अंतर उसकी जिंदगी बदल सकता था। जिस जगह रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वह जाती थी, उसी बाथरूम की छत अचानक नीचे आ गई।

हादसे के बाद उसके मन में बार-बार यही सवाल आने लगा कि अगर उस समय वह बाथरूम में होती तो क्या होता? रात के सन्नाटे में अचानक छत गिरने की आवाज और उसके बाद मलबा देखकर किसी के लिए भी खुद को संभाल पाना आसान नहीं होगा।

युवती ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से दिल्ली-नोएडा के PG में रहकर पढ़ाई और नौकरी से जुड़ी जिंदगी जी रही है। लेकिन PG में रहने के दौरान मौत या गंभीर हादसे का डर उसे पहले कभी इस तरह महसूस नहीं हुआ था।

दिल्ली PG हादसे के बाद बढ़ी चिंता

नोएडा की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक PG की पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। इस हादसे के बाद PG और हॉस्टल की इमारतों की सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दिल्ली के इस हादसे के बाद PG में रहने वाले कई छात्रों और युवाओं में डर बढ़ा है। कई लोगों ने असुरक्षित इमारतों को लेकर चिंता जताई है और सुरक्षित आवास की मांग उठाई है।

ऐसे माहौल में नोएडा की युवती का अनुभव इस चिंता को और गहरा करता है। हालांकि नोएडा की घटना को दिल्ली के बड़े हादसे से जोड़कर देखने के बजाय दोनों मामलों की परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है, लेकिन दोनों घटनाएं किराये के आवासों में सुरक्षा जांच की जरूरत जरूर सामने लाती हैं।

PG में रहने वालों के लिए बड़ा सवाल सुरक्षा का

बड़े शहरों में पढ़ाई और नौकरी के लिए आने वाले हजारों युवा PG और किराये के कमरों पर निर्भर रहते हैं। कई बार रहने की जगह चुनते समय किराया, लोकेशन, मेट्रो की दूरी, खाना और दूसरी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

युवती की आपबीती इसी समस्या की तरफ इशारा करती है। किसी भी PG में रहने वाले व्यक्ति के लिए यह जानना जरूरी है कि भवन कितना सुरक्षित है, बिजली और पानी की व्यवस्था कैसी है, आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता है या नहीं और इमारत का नियमित रखरखाव किया जाता है या नहीं।

कस्टमर नहीं, इंसान समझें’

युवती ने अपनी कहानी केवल डर पैदा करने के लिए साझा नहीं की। उसका कहना है कि PG में रहने वाले युवाओं को सिर्फ ग्राहक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। वे भी किसी परिवार के सदस्य हैं और सुरक्षित रहने का अधिकार रखते हैं।

उसकी बात में उन हजारों युवाओं की चिंता दिखाई देती है जो अपने घर से दूर बड़े शहरों में पढ़ाई या नौकरी के लिए रहते हैं। किराया देने के साथ उन्हें सुरक्षित और रहने योग्य वातावरण मिलना भी उतना ही जरूरी है।

हादसे ने छोड़े कई सवाल

नोएडा PG की इस घटना में युवती और उसकी रूममेट सुरक्षित रहीं, लेकिन छत का अचानक गिरना अपने आप में चिंता का विषय है। सवाल यह है कि क्या भवन में पहले से कोई खराबी थी? क्या नियमित निरीक्षण किया जाता था? क्या मरम्मत की जरूरत पहले से महसूस की गई थी? और क्या PG संचालक ने रहने वालों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कदम उठाए थे?

इन सवालों के जवाब घटना की विस्तृत जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकते हैं। फिलहाल युवती की आपबीती ने PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर एक जरूरी बहस जरूर छेड़ दी है।

बड़े शहरों में रहने की मजबूरी के बीच सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। एक छोटी सी लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। नोएडा की इस युवती के लिए यह घटना एक डरावनी याद बन गई, लेकिन उसकी कहानी उन लोगों के लिए चेतावनी भी है जो बिना सुरक्षा जांच के किसी भी PG में रहने का फैसला कर लेते हैं।

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