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बहुत गर्म चाय-कॉफी पीते हैं तो सावधान, कैंसर का खतरा बढ़ा

नई दिल्ली: चाय और कॉफी भारत समेत दुनिया के कई देशों में रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान मिटाने तक लोग गर्म चाय या कॉफी पीना पसंद करते हैं। लेकिन अगर आप इसे बहुत ज्यादा गर्म तापमान पर पीने के आदी हैं, तो यह आदत आपकी […]

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  • September 11, 2026 10:51 am IST, Published 1 day ago

नई दिल्ली: चाय और कॉफी भारत समेत दुनिया के कई देशों में रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान मिटाने तक लोग गर्म चाय या कॉफी पीना पसंद करते हैं। लेकिन अगर आप इसे बहुत ज्यादा गर्म तापमान पर पीने के आदी हैं, तो यह आदत आपकी सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों में बहुत गर्म पेय पदार्थों और एसोफैगल कैंसर (Esophageal Cancer) यानी भोजन नली के कैंसर के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य तापमान पर चाय या कॉफी पीने से कैंसर होता है।

बहुत गर्म पेय को लेकर क्या कहती है रिसर्च?

International Journal of Cancer में प्रकाशित एक बड़े संभावित अध्ययन में चाय पीने के तापमान और एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के जोखिम के बीच संबंध की जांच की गई। इस अध्ययन में ईरान के गोलस्तान कोहोर्ट के 50,045 लोगों को शामिल किया गया और प्रतिभागियों का औसतन करीब 10.1 वर्षों तक फॉलोअप किया गया। इस दौरान एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के 317 नए मामले सामने आए।

अध्ययन में पाया गया कि 60 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाली चाय पीने वालों में 60 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाली चाय की तुलना में एसोफैगल कैंसर का जोखिम अधिक था। वहीं, जो लोग चाय को “बहुत गर्म” पीना पसंद करते थे, उनमें ठंडी या गुनगुनी चाय पीने वालों की तुलना में जोखिम दोगुने से ज्यादा पाया गया।

इस रिसर्च के मुताबिक, रोजाना 700 मिलीलीटर या उससे ज्यादा चाय को 60 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर पीने वालों में कम मात्रा और कम तापमान वाली चाय पीने वालों की तुलना में जोखिम करीब 90 प्रतिशत अधिक देखा गया।

क्या सच में कैंसर का खतरा 3 गुना हो सकता है?

यहां एक जरूरी बात समझना बेहद महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया पोस्ट में “3 गुना” जोखिम की बात कही गई है, लेकिन यह आंकड़ा हर चाय या कॉफी पीने वाले व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।

International Journal of Cancer में प्रकाशित पश्चिमी केन्या के एक अन्य केस-कंट्रोल अध्ययन में बहुत गर्म पेय पीने वालों में एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम गर्म या सामान्य तापमान के पेय पीने वालों की तुलना में करीब 3.7 गुना पाया गया। अध्ययन में शामिल पेय पदार्थों में 95 प्रतिशत से अधिक चाय थी।

इसलिए “बहुत गर्म चाय-कॉफी से हर व्यक्ति में कैंसर का खतरा तीन गुना हो जाता है” कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। जोखिम अध्ययन की आबादी, पेय के तापमान और अन्य स्वास्थ्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

आखिर बहुत गर्म पेय से खतरा क्यों बढ़ सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार इसका एक संभावित कारण भोजन नली की बार-बार होने वाली गर्मी से होने वाली चोट हो सकता है। लगातार बहुत गर्म तरल पदार्थ भोजन नली की अंदरूनी सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी थर्मल चोट और सूजन जैसी प्रक्रियाएं कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकती हैं। उच्च तापमान वाले पेय और भोजन को लेकर प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा में भी अधिक तापमान पर पेय लेने और एसोफैगल कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध के प्रमाण मिले थे।

यानी समस्या केवल चाय या कॉफी के नाम की नहीं, बल्कि उसे किस तापमान पर पिया जा रहा है, इससे भी जुड़ी हो सकती है।

कितनी गर्म चाय या कॉफी से बचना चाहिए?

उपलब्ध शोध के आधार पर बहुत ज्यादा गर्म पेय को सीधे पीने से बचना बेहतर माना जाता है। 2020 में प्रकाशित बड़े चाय अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 60 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर पेय पीने की सलाह को एक संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय के रूप में उल्लेख किया था।

इसका आसान तरीका है कि कप में चाय या कॉफी डालने के तुरंत बाद उसे न पिएं। कुछ देर रुकें, ताकि तापमान कम हो जाए। अगर पहला घूंट लेते ही मुंह या जीभ में तेज गर्मी महसूस होती है, तो पेय को थोड़ा और ठंडा होने देना बेहतर है।

सिर्फ चाय-कॉफी ही नहीं, गर्म पेय की आदत पर दें ध्यान

रिसर्च का मुख्य संदेश यह नहीं है कि चाय या कॉफी पूरी तरह छोड़ दी जाए। बल्कि ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि पेय बहुत गर्म न हो। उपलब्ध अध्ययनों में उच्च तापमान वाले पेय और एसोफैगल कैंसर के बीच संबंध लगातार सामने आया है।

इसके अलावा कैंसर का जोखिम केवल एक आदत से तय नहीं होता। तंबाकू और शराब जैसे अन्य ज्ञात जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केवल चाय के तापमान पर ध्यान देने के बजाय संपूर्ण जीवनशैली को स्वस्थ रखना जरूरी है।

क्या कॉफी छोड़ देनी चाहिए?

नहीं। उपलब्ध शोध को देखकर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि हर व्यक्ति को कॉफी या चाय छोड़ देनी चाहिए। यहां मुख्य चिंता बहुत अधिक तापमान है। यूरोपियन प्रॉस्पेक्टिव इन्वेस्टिगेशन इन कैंसर एंड न्यूट्रिशन से जुड़े एक अध्ययन ने भी चाय और कॉफी की मात्रा तथा एसोफैगल कैंसर के बीच संबंधों का अलग-अलग आकलन किया था।

इसलिए अपनी पसंदीदा चाय या कॉफी का आनंद लिया जा सकता है, लेकिन उसे उबलता हुआ पीने की आदत से बचना समझदारी है।

अगर आप चाय या कॉफी को इतना गर्म पीते हैं कि उसे पीते समय मुंह जलने जैसा महसूस होता है, तो अपनी आदत बदलना बेहतर है। वैज्ञानिक अध्ययनों में बहुत गर्म पेय और एसोफैगल कैंसर के जोखिम के बीच संबंध सामने आया है। कुछ अध्ययनों में बहुत गर्म पेय पीने वालों में जोखिम कई गुना तक अधिक पाया गया है, लेकिन इसे हर व्यक्ति पर लागू होने वाला निश्चित जोखिम नहीं माना जाना चाहिए।

सबसे आसान सावधानी यही है—चाय या कॉफी को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर आराम से पिएं।

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