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BRIC से BRICS तक: ऐसे बदला दुनिया के बड़े मंच का चेहरा

नई दिल्ली: आज जब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति में BRICS का नाम लगातार चर्चा में रहता है, तब शायद ही बहुत कम लोगों को पता हो कि इसकी शुरुआत एक औपचारिक संगठन के तौर पर नहीं, बल्कि एक आर्थिक अवधारणा के रूप में हुई थी। जिस समूह को आज दुनिया के प्रमुख उभरते देशों […]

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  • September 12, 2026 8:00 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: आज जब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति में BRICS का नाम लगातार चर्चा में रहता है, तब शायद ही बहुत कम लोगों को पता हो कि इसकी शुरुआत एक औपचारिक संगठन के तौर पर नहीं, बल्कि एक आर्थिक अवधारणा के रूप में हुई थी। जिस समूह को आज दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के मंच के तौर पर देखा जाता है, उसकी कहानी BRIC से शुरू होकर BRICS और फिर विस्तारित BRICS तक पहुंची है।

भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों को जोड़ने वाला यह मंच आज ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की कोशिश करता है। लेकिन आखिर BRIC नाम कहां से आया, इसमें S कब जुड़ा और यह समूह इतना बड़ा कैसे होता गया? आइए पूरी कहानी समझते हैं।

BRIC नाम की शुरुआत कहां से हुई?

BRICS की कहानी को समझने के लिए साल 2001 में वापस जाना होगा। उस समय Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने एक रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। BRIC में Brazil, Russia, India और China के शुरुआती अक्षर शामिल थे।

यह उस समय कोई राजनीतिक संगठन या औपचारिक समूह नहीं था। इसका इस्तेमाल उन चार बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ देखने के लिए किया गया था, जिनके आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डालने की संभावना जताई गई थी। बाद में इन देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ने लगीं।

2006 में आया बड़ा मोड़

BRIC की अवधारणा को राजनीतिक और कूटनीतिक मंच में बदलने की दिशा में 2006 महत्वपूर्ण साल रहा। भारत, रूस, चीन और ब्राजील के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई।

यहीं से चारों देशों के बीच नियमित संवाद और सहयोग का रास्ता मजबूत हुआ। हालांकि उस समय तक BRIC कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं था। इसके बावजूद चारों देशों ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर विचार करना शुरू किया।

2009 में पहली BRIC शिखर बैठक

BRIC ने अगला बड़ा कदम 2009 में उठाया। रूस के येकातेरिनबर्ग में BRIC देशों की पहली शिखर बैठक हुई। पहली बार चारों देशों के शीर्ष नेताओं ने एक साथ बैठकर वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।

यह बैठक ऐसे समय हुई थी जब पूरी दुनिया 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के असर से जूझ रही थी। ऐसे माहौल में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों का महत्व और बढ़ गया।

इसके बाद BRIC केवल अर्थव्यवस्था से जुड़ा विचार नहीं रहा, बल्कि एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के रूप में अपनी पहचान बनाने लगा। BRICS की आधिकारिक दस्तावेज सूची में 2009 के पहले BRIC शिखर सम्मेलन की घोषणा भी दर्ज है।

फिर BRIC में जुड़ा ‘S’, कैसे बना BRICS?

अब आती है इस कहानी की सबसे अहम कड़ी। BRIC में S यानी South Africa कब और क्यों जुड़ा?

दक्षिण अफ्रीका को BRIC समूह में शामिल करने की प्रक्रिया 2010 में आगे बढ़ी और इसके बाद समूह का नाम BRICS हो गया। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से इस मंच का भौगोलिक दायरा भी काफी बढ़ गया। अब इसमें एशिया, यूरोप-एशिया क्षेत्र, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व होने लगा।

दक्षिण अफ्रीका के प्रवेश के बाद BRICS ने खुद को केवल चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विकासशील और ग्लोबल साउथ से जुड़े व्यापक मुद्दों पर चर्चा का मंच बनना शुरू किया। आधिकारिक BRICS सामग्री के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के प्रवेश के साथ BRIC का नाम BRICS हुआ

BRICS का एजेंडा सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं

समय के साथ BRICS का एजेंडा लगातार व्यापक होता गया। शुरुआत में जहां चर्चा मुख्य रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था को लेकर थी, वहीं बाद में राजनीतिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं तकनीक, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्र भी इसके दायरे में आए।

BRICS की आधिकारिक संरचना में सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ बताए गए हैं—Political and Security Cooperation, Economic and Financial Cooperation और People-to-People Cooperation।

इसका मतलब है कि BRICS अब सिर्फ नेताओं की बैठक का नाम नहीं है। इसके तहत मंत्रिस्तरीय बैठकें, विशेषज्ञ समूह, कारोबारी मंच, युवा और शैक्षणिक कार्यक्रम तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की गतिविधियां भी होती हैं।

2023 में फिर हुआ बड़ा विस्तार

BRICS के इतिहास में दूसरा बड़ा विस्तार 2023 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में देखने को मिला। इस सम्मेलन में कई देशों को नए सदस्य के तौर पर शामिल करने का फैसला लिया गया।

घोषणा के अनुसार Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia और United Arab Emirates समेत नए देशों के प्रवेश का रास्ता खोला गया। आधिकारिक दस्तावेज में इन छह देशों को 1 जनवरी 2024 से पूर्ण सदस्य बनाने का निर्णय दर्ज है, जिसमें Argentina भी शामिल था। बाद में Argentina ने शामिल होने से इनकार कर दिया।

इसके बाद BRICS का आकार पहले के पांच सदस्यीय समूह की तुलना में काफी बड़ा हो गया। Indonesia के जुड़ने के साथ इसका विस्तार और आगे बढ़ा। 2025 की आधिकारिक BRICS सामग्री समूह में 11 सदस्य देशों का उल्लेख करती है—Brazil, Russia, India, China, South Africa, Saudi Arabia, Egypt, UAE, Ethiopia, Indonesia और Iran।

2026 में भारत की अहम भूमिका

BRICS की बदलती कहानी में 2026 भारत के लिए भी महत्वपूर्ण साल है। भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इसी दौरान नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां हुईं।

भारत की अध्यक्षता के तहत BRICS से जुड़े कई कार्यक्रम और बैठकें आयोजित की जा रही हैं। विदेश मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक स्रोत के अनुसार 2026 में नई दिल्ली में BRICS Summit प्रस्तावित है और भारत की अध्यक्षता के दौरान राजनीतिक, आर्थिक, वित्तीय तथा अन्य क्षेत्रों में व्यापक गतिविधियां निर्धारित की गई हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?

BRICS की बढ़ती सदस्यता को केवल देशों की संख्या बढ़ने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह वैश्विक व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

समूह के सदस्य देश वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने, व्यापार एवं निवेश सहयोग मजबूत करने और वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं।

यही वजह है कि BRICS अब दुनिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसकी खासियत यह भी है कि सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं और विदेश नीति प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। इसके बावजूद वे कुछ साझा आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों पर सहयोग करने की कोशिश करते हैं।

BRIC से BRICS और फिर विस्तारित BRICS तक

अगर पूरी कहानी को एक लाइन में समझें तो 2001 में BRIC एक आर्थिक अवधारणा के रूप में सामने आया, 2006 में चार देशों के बीच औपचारिक संवाद शुरू हुआ, 2009 में पहला शिखर सम्मेलन हुआ, दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से BRICS बना और 2023 के बाद इसका विस्तार कई नए देशों तक हुआ।

यानी आज का BRICS उस छोटे से समूह का विस्तारित रूप है, जिसे कभी दुनिया की चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल किए गए एक शब्द के तौर पर देखा गया था। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव कितना बढ़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके सदस्य आर्थिक सहयोग, राजनीतिक समन्वय और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर कितनी मजबूती से साथ आते हैं।

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