BRICS Summit के बीच अलकायदा कनेक्शन, UP ATS की बड़ी कार्रवाई

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने आजमगढ़ में 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि नबील प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से प्रभावित होकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर […]

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  • September 13, 2026 10:30 pm IST, Published 41 minutes ago

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने आजमगढ़ में 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि नबील प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से प्रभावित होकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब देश में BRICS Summit से जुड़े कूटनीतिक और सुरक्षा घटनाक्रम भी चर्चा में हैं।

UP ATS के मुताबिक, गिरफ्तार युवक आजमगढ़ के दीदारगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला है। एजेंसी ने उसके डिजिटल नेटवर्क की जांच के दौरान AQIS से संबंधित सामग्री और ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया है। ATS अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ऑनलाइन नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए थे तथा उनकी भूमिका क्या थी।

WhatsApp ग्रुप के जरिए युवाओं को जोड़ने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार मोहम्मद नबील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग माध्यमों पर युवाओं से संपर्क कर रहा था। ATS का दावा है कि उसने ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम से एक WhatsApp ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों के लोग जुड़े हुए थे और आतंकवादी विचारधारा से संबंधित सामग्री साझा की जाती थी।

ATS ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्रुप के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने और कथित तौर पर जिहादी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। जांच में जम्मू-कश्मीर के युवाओं के साथ-साथ विदेशों में मौजूद कुछ लोगों के संपर्क में होने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इन संपर्कों की वास्तविक भूमिका और नेटवर्क की व्यापकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कोडवर्ड के इस्तेमाल का भी दावा

UP ATS के अनुसार डिजिटल बातचीत की जांच में कुछ गतिविधियों के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसी ने दावा किया कि बातचीत में कुछ सामान्य शब्दों का इस्तेमाल कथित संवेदनशील गतिविधियों के लिए किया जाता था। एजेंसी के अनुसार इसका उद्देश्य बातचीत की वास्तविक मंशा को छिपाना हो सकता था।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। ATS अब डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी का नेटवर्क कितना बड़ा था और ऑनलाइन संपर्कों में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।

आतंकी साहित्य साझा करने का आरोप

ATS ने यह भी दावा किया है कि नबील से जुड़े ऑनलाइन समूहों में अलकायदा की विचारधारा से संबंधित साहित्य साझा किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी को ऐसे डिजिटल कंटेंट के बारे में जानकारी मिली, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस मामले का यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिशें जांच एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल फुटप्रिंट, चैट, ग्रुप में मौजूद सदस्यों और आर्थिक लेनदेन की जांच से नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से संपर्क की जांच

UP ATS ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान पाकिस्तान, तुर्किये और बांग्लादेश की यात्रा तथा कथित आतंकी प्रशिक्षण से जुड़ी चर्चाओं के संकेत भी मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, कुछ बातचीत में आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण हासिल करने और नेटवर्क को आगे बढ़ाने से संबंधित बातें सामने आईं।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच के बाद ही होगी। फिलहाल जांच एजेंसी आरोपी के डिजिटल संपर्कों, सोशल मीडिया ग्रुप और कथित विदेशी संपर्कों की पड़ताल कर रही है।

विस्फोटक सामग्री से जुड़ी बातचीत का दावा

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि डिजिटल बातचीत में विस्फोटक तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री और उससे संबंधित जानकारी को लेकर चर्चा हुई थी। यह दावा मामले को गंभीर बनाता है और इसी वजह से जांच एजेंसियां डिजिटल डिवाइस तथा ऑनलाइन नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरोपी अकेले कथित गतिविधियां संचालित कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा ऑनलाइन नेटवर्क सक्रिय था। इसी दिशा में पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

BNS और UAPA के तहत मामला दर्ज

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार UP ATS ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ATS ने 12 सितंबर को आजमगढ़ से गिरफ्तारी की कार्रवाई की और आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किए जाने की जानकारी दी है।

अब आगे की जांच में यह तय होगा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए एजेंसी के पास किस तरह के डिजिटल और अन्य साक्ष्य हैं। साथ ही, कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान और भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा होगी।

जांच के बाद सामने आएगी नेटवर्क की पूरी तस्वीर

आजमगढ़ की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, किसी भी आरोपी पर लगे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। फिलहाल UP ATS की जांच का फोकस डिजिटल संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों, कथित विदेशी कनेक्शन और नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों पर है।

मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मोहम्मद नबील के कथित ऑनलाइन नेटवर्क की पहुंच कितनी थी और क्या इसमें अन्य राज्यों या देशों से जुड़े लोग भी सक्रिय थे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस जांच का परिणाम इसलिए भी अहम होगा क्योंकि इससे ऑनलाइन माध्यमों से कथित कट्टरपंथी गतिविधियों के संचालन के तरीके और संभावित नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है।

नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप UP ATS और मीडिया रिपोर्टों में बताए गए दावों पर आधारित हैं। आरोपी की दोषसिद्धि अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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