• होम
  • देश
  • मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों पर सरकार सख्त

मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों पर सरकार सख्त

निजी अस्पतालों और चिकित्सा क्षेत्र से बातचीत शुरू नई दिल्ली। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरणों की मनमानी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। सरकार ने चिकित्सा उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाने के मुद्दे पर चिकित्सा क्षेत्र तथा निजी अस्पतालों के साथ बातचीत […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 20, 2026 7:54 am IST, Published 60 minutes ago

निजी अस्पतालों और चिकित्सा क्षेत्र से बातचीत शुरू

नई दिल्ली। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरणों की मनमानी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। सरकार ने चिकित्सा उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाने के मुद्दे पर चिकित्सा क्षेत्र तथा निजी अस्पतालों के साथ बातचीत शुरू की है।

हाल ही में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में सामने आया था कि कुछ निजी अस्पताल मरीजों से चिकित्सा उपकरणों के लिए बाजार मूल्य और वास्तविक लागत की तुलना में कई गुना अधिक कीमत वसूल रहे हैं।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त ने अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की कीमत और उनके अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच भारी अंतर को लेकर सवाल उठाए थे। इससे पहले अगस्त में स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने भी निजी अस्पतालों में इलाज के लिए मरीजों से ली जाने वाली रकम की सीमा तय करने की सिफारिश की थी।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए बातचीत के निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने औषधि विभाग के सचिव के साथ बैठक के बाद चिकित्सा क्षेत्र और अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने तथा इस मुद्दे पर विस्तृत संवाद शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों की कीमतों में पारदर्शिता लाना और मरीजों पर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना है।

दवाओं की कीमतों पर भी नियंत्रण की व्यवस्था

दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार पहले से ही औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत व्यवस्था लागू कर रही है। इसके जरिए आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखा जाता है, ताकि वे मरीजों को उचित कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

एम्स कल्याणी के अध्यक्ष डॉ. वाई.के. गुप्ता के अनुसार, राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल दवाएं निर्धारित श्रेणी में आती हैं और उनकी कीमतों को नियंत्रित किया जाता है।

हालांकि, कुछ गैर-निर्धारित दवाएं भी होती हैं, जिनकी कीमतें औषधि कंपनियां अपनी नीतियों के अनुसार तय कर सकती हैं।

सिरिंज और दस्ताने जैसे उपकरणों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं

चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं और उपकरणों, जैसे सिरिंज और दस्ताने, की कीमतों पर भी प्रभावी मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है।

इसका परिणाम यह होता है कि किसी उपकरण की उत्पादन लागत, अस्पताल द्वारा वहन की जाने वाली लागत और मरीज से वसूली जाने वाली कीमत के बीच काफी बड़ा अंतर हो जाता है।

कुछ उपकरणों की कीमत में 10 से 20 गुना तक अंतर

मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ समान चिकित्सा वस्तुओं की कीमत में बाजार के अधिकतम खुदरा मूल्य की तुलना में 10 से 20 गुना तक का अंतर देखा गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों को उचित मुनाफा कमाने का अधिकार है, लेकिन मरीजों से जरूरत से ज्यादा कीमत वसूलने की व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण होना चाहिए।

मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता से समझौता किए बिना मरीजों को आर्थिक शोषण से बचाना होना चाहिए। साथ ही, चिकित्सा उपकरणों की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है।

सरकार की पहल से मरीजों को राहत की उम्मीद

चिकित्सा उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत बनाने की सरकार की पहल ऐसे समय में हुई है, जब निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि उपकरणों की कीमतों को लेकर स्पष्ट नियम और निगरानी व्यवस्था लागू होती है, तो मरीजों से वसूले जाने वाले उपचार खर्च में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

Advertisement