नई दिल्ली : स्वस्ति दास सेवा संस्थान (SDSS), River Cleanup और यमुना संसद (माता ललिता देवी सेवाश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित) के संयुक्त तत्वाधान में आज सिग्नेचर ब्रिज यमुना घाट पर यमुना स्वच्छता को लेकर एक विशाल महा सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान में दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े 800 से अधिक युवाओं ने एक साथ श्रमदान किया।
सुबह 7 बजे से दोपहर तक चले इस अभियान में युवाओं ने घाट से कई टन कचरा, सिंगल यूज प्लास्टिक, कपड़े, कांच की बोतलें और जूते-चप्पल निकाले। कचरे के साथ-साथ घाट से सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज जो निकली, वो थी टूटी हुई भगवानों की मूर्तियाँ, फूल-मालाएं, पूजा सामग्री और धार्मिक महत्व की वस्तुएं, जिन्हें लोगों ने आस्था के नाम पर यमुना में फेंक दिया था।
यह दृश्य अपने आप में यह बताने के लिए काफी था कि हमारे देश में आस्था तो है, पर सिविक सेंस की कितनी कमी है। हम पूजा तो करते हैं, पर उस पूजा के बाद बची सामग्री को सम्मान के साथ निस्तारित करना नहीं जानते।
यह अभियान एक उपलब्धि क्यों है?
यह सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं था, यह युवाओं के द्वारा देश को एक आईना दिखाने का प्रयास था। SDSS पिछले 10 वर्षों से वज़ीरपुर की गलियों से लेकर यमुना घाट तक स्वच्छता की अलख जगा रहा है, लेकिन पहली बार 3 बड़े संगठनों ने एक मंच पर आकर इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब युवा ठान ले, तो यमुना को बचाया जा सकता है। यहाँ से हमने सिर्फ कचरा नहीं उठाया, हमने लोगों की उस मानसिकता को उठाया है जो नदी को कूड़ेदान समझती है। इस अवसर पर तीनों संस्थाओं के प्रमुखों ने युवाओं को संबोधित किया और देश में सिविक सेंस की कमी पर चिंता जताई।
River Cleanup के अभिषेक कुमार पटेल ने कहा, “यमुना कोई नाली नहीं, हमारी संस्कृति है। मूर्तियों का विसर्जन आस्था का विषय है, लेकिन खंडित मूर्तियों को ऐसे फेंकना आस्था का अपमान है। हमें वैज्ञानिक और सम्मानजनक निस्तारण के तरीके अपनाने होंगे।”
यमुना संसद के श्री रवि शंकर तिवारी जी ने कहा, “यमुना आज मदद के लिए पुकार रही है। यह गुहार है हर नागरिक से कि वो अपनी जिम्मेदारी समझे। सिविक सेंस कोई किताब में पढ़ने की चीज नहीं, यह हमारे संस्कारों में होना चाहिए। आज का यह अभियान उसी सिविक सेंस और जागरूकता को देश भर में ले जाने का एक छोटा सा प्रयास है।”
SDSS के संस्थापक विनय दास ने कहा, “सफाई सिर्फ घाट की नहीं, सोच की भी करनी होगी। हम यमुना को माँ कहते हैं और उसी माँ में कचरा फेंकते हैं। जब तक हमारे अंदर सिविक सेंस नहीं आएगा, तब तक कोई भी सरकार यमुना को साफ नहीं कर सकती। आज 800 युवाओं ने यह साबित किया है कि देश का युवा जाग चुका है और अब वो दूसरों को भी जगाएगा।”
तीनों संगठनों ने मिलकर सभी नागरिकों से अपील की है कि यमुना घाटों को कूड़ेदान न बनाएं, पूजा सामग्री को यमुना में न फेंके और अपने घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
अभियान के अंत में सभी युवाओं ने स्वच्छ यमुना, स्वच्छ भारत का संकल्प लिया।