वाराणसी। काशी और पूर्वांचल के युवाओं के लिए रोजगार के क्षेत्र में एक नई पहल आकार लेती नजर आ रही है। युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार करने के लिए वाराणसी में मल्टी स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MSTI) स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है। इस पहल में टाटा समेत देश की 13 बड़ी कंपनियों को जोड़ने की तैयारी है। योजना का उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है।
बताया गया है कि भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस दिशा में कंपनियों से संपर्क किया है। उद्योगों की जरूरत और उपलब्ध रोजगार अवसरों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का स्वरूप तय किए जाने की बात सामने आई है। इससे युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक और तकनीकी कौशल हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
लालपुर में तैयार होगा आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर
प्रस्तावित योजना के तहत लालपुर में ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने की तैयारी है। वर्तमान में यहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) का संचालन हो रहा है। NIFT के लिए तैयार नए भवन के उपयोग में आने और संस्थान के नए परिसर में स्थानांतरित होने के बाद मौजूदा परिसर को युवाओं के कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना बताई गई है।
प्रस्तावित सेंटर को केवल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने के बजाय इसे युवाओं को उद्योगों से जोड़ने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार करने की योजना है। यहां प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में आवश्यक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल सिखाया जाएगा। इससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को कंपनियों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
MSTI के साथ मॉडल करियर सेंटर भी बनेगा
योजना में मल्टी स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के साथ मॉडल करियर सेंटर स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इस सेंटर में युवाओं को करियर से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने, रोजगार के विकल्प समझाने और उनकी रुचि एवं योग्यता के अनुसार क्षेत्र चुनने में सहायता देने की व्यवस्था किए जाने की बात है।
इसके साथ ही ऑक्यूपेशन डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी को कम करना होगा। युवाओं की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें ऐसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा, जहां उद्योगों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत है।
इस मॉडल के तहत युवाओं को केवल प्रमाणपत्र हासिल करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें रोजगार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की कोशिश होगी।
कंपनियों की जरूरत के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कंपनियों की भागीदारी मानी जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में अलग-अलग कंपनियों के प्रतिनिधि प्रशिक्षक की भूमिका में युवाओं को आवश्यक कौशल प्रदान कर सकते हैं। कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग कार्यों और तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की रूपरेखा तय कर सकती हैं।
इससे प्रशिक्षण और नौकरी के बीच बेहतर तालमेल बनाने की संभावना है। जिन युवाओं को प्रशिक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्र का व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा, उनके लिए आगे कंपनियों में अवसर तलाशना आसान हो सकता है।
योजना के अनुसार प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के चयन में भी कंपनियों की भूमिका हो सकती है। यानी प्रशिक्षण के बाद योग्य उम्मीदवारों को उनकी क्षमता और संबंधित कार्यक्षेत्र के आधार पर रोजगार के लिए चुने जाने की संभावना रहेगी।
15 हजार से 80 हजार रुपये तक वेतन की संभावना
प्रस्तावित योजना से जुड़ी जानकारी में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए 15 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि वास्तविक वेतन उम्मीदवार की योग्यता, प्रशिक्षण, कार्यक्षेत्र, अनुभव और संबंधित कंपनी की भर्ती नीति पर निर्भर करेगा।
वेतन की यह संभावित सीमा युवाओं के लिए अलग-अलग स्तर के रोजगार अवसरों की ओर संकेत करती है। शुरुआती स्तर पर कम अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्रवेश स्तर की नौकरियां मिल सकती हैं, जबकि तकनीकी दक्षता और विशेष कौशल रखने वाले युवाओं के लिए अपेक्षाकृत बेहतर पैकेज वाले अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
इससे पूर्वांचल के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे महानगरों का रुख करने से पहले अपने क्षेत्र में ही कौशल और अवसर तलाशने का विकल्प मिल सकता है।
होटल से सॉफ्टवेयर तक कई क्षेत्रों में अवसर
मॉडल करियर सेंटर और प्रस्तावित प्रशिक्षण व्यवस्था के माध्यम से होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीकी कार्य, सॉफ्टवेयर समेत विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किए जाने की बात है।
आज रोजगार बाजार में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं मानी जाती। कंपनियां तकनीकी दक्षता, डिजिटल समझ, संचार क्षमता और व्यावहारिक अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार किया गया प्रशिक्षण युवाओं के लिए उपयोगी हो सकता है।
खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवाओं के लिए ऐसी व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्हें अक्सर रोजगार की जानकारी, प्रशिक्षण और कंपनियों तक पहुंच के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
पूर्वांचल के युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर की उम्मीद
वाराणसी लंबे समय से पूर्वांचल के प्रमुख शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक केंद्रों में शामिल रहा है। ऐसे में यहां कौशल विकास और उद्योग आधारित प्रशिक्षण की सुविधा विकसित होने से आसपास के जिलों के युवाओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।
इस पहल का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम कितनी नियमितता से संचालित होते हैं, कितने युवाओं को प्रशिक्षण मिलता है और प्रशिक्षण के बाद कितने उम्मीदवार वास्तव में रोजगार से जुड़ते हैं। कंपनियों की सक्रिय भागीदारी भी इस पूरी व्यवस्था की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल प्रस्तावित MSTI, मॉडल करियर सेंटर और ऑक्यूपेशन डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर को लेकर तैयारियां रोजगार और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखी जा रही हैं। यदि योजना अपने निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो काशी में युवाओं के लिए प्रशिक्षण से लेकर रोजगार तक एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित हो सकता है, जहां उद्योगों की जरूरत और युवाओं की क्षमता के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया जा सके।