ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में रेल परिवहन की तस्वीर बदलने वाली महत्वाकांक्षी बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। प्रस्तावित टर्मिनल के विस्तार के लिए लगभग 267 एकड़ क्षेत्र निर्धारित किए जाने की खबर है। यह परियोजना दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत प्रस्तावित मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अप्रैल 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, टर्मिनल के विस्तार के लिए करीब 137 एकड़ अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता थी। संबंधित किसानों की सहमति मिलने से भूमि संबंधी बाधाओं को दूर करने की दिशा में प्रगति हुई है।
267 एकड़ में क्या-क्या बनेगा?
प्रस्तावित रेलवे टर्मिनल को आधुनिक यात्री सुविधाओं और बेहतर परिवहन व्यवस्था के साथ विकसित करने की योजना है। परियोजना के अंतर्गत रेलवे प्लेटफॉर्म, यार्ड, यात्री प्रतीक्षालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हालिया रिपोर्टों में 12 से 13 प्लेटफॉर्म बनाए जाने का उल्लेख है। रेलवे यार्ड और लूप लाइनों की मदद से अधिक ट्रेनों का संचालन तथा रखरखाव संभव बनाने की योजना है। हालांकि, प्लेटफॉर्म की अंतिम संख्या और संचालन व्यवस्था की पुष्टि विस्तृत आधिकारिक दस्तावेजों से ही होगी।
रेलवे, मेट्रो और बस सेवाओं का होगा संगम
बोड़ाकी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता अलग-अलग परिवहन सेवाओं को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है।डीएमआईसी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड की आधिकारिक परियोजना जानकारी के अनुसार, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब में आधुनिक रेलवे टर्मिनल के साथ अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, व्यावसायिक परिसर, होटल और खरीदारी की सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इससे यात्रियों को परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच यात्रा बदलने में आसानी होगी। उदाहरण के लिए, दूसरे राज्यों से ट्रेन द्वारा आने वाले यात्री आगे की यात्रा मेट्रो या बस से कर सकेंगे। नमो भारत नेटवर्क से संभावित संपर्क को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, संबंधित कॉरिडोर की स्वीकृति, अंतिम मार्ग और संचालन की समयसीमा को अलग से देखना आवश्यक है।
दिल्ली और गाजियाबाद जाने वाले यात्रियों को राहत
वर्तमान में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बड़ी संख्या में यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए नई दिल्ली, आनंद विहार या गाजियाबाद जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है।
बोड़ाकी में बड़ा रेलवे टर्मिनल विकसित होने पर यह निर्भरता कम हो सकती है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर यात्रा करने वाले लोगों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। मीडिया रिपोर्टों में भविष्य में यहां से लगभग 70 से 100 ट्रेनों के संचालन की क्षमता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों को वर्तमान में स्वीकृत ट्रेन सेवाओं या घोषित समयसारिणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जमीन अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों का मुद्दा
परियोजना के सामने जमीन की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। रेलवे टर्मिनल के विस्तार के लिए आसपास के सात गांवों की भूमि की आवश्यकता बताई गई है। जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया से लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में पुनर्वास, मुआवजा और प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था परियोजना के महत्वपूर्ण पहलू हैं। भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करने के साथ स्थानीय निवासियों के हितों का ध्यान रखना भी आवश्यक होगा।
आसपास के क्षेत्रों में बढ़ सकती हैं आर्थिक गतिविधियां
बोड़ाकी टर्मिनल से ग्रेटर नोएडा, दादरी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। रेलवे स्टेशन के आसपास होटल, कार्यालय, दुकानों, खानपान केंद्रों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास के अवसर पैदा हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश संबंधी जानकारी के अनुसार, दादरी के मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब और बोड़ाकी के ट्रांसपोर्ट हब से संयुक्त रूप से वर्ष 2040 तक लगभग एक लाख रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। यह दोनों परियोजनाओं का दीर्घकालिक अनुमान है, केवल रेलवे टर्मिनल में मिलने वाली नौकरियों की संख्या नहीं।
एक्सप्रेसवे से बेहतर संपर्क की योजना
बोड़ाकी की भौगोलिक स्थिति भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों के निकट स्थित है। सड़क और रेल नेटवर्क के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होने से यात्रियों को विभिन्न शहरों तक पहुंचने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, दादरी में प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स हब माल परिवहन और औद्योगिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
आखिर कब तक तैयार होगा रेलवे टर्मिनल?
परियोजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके निर्माण और संचालन की समयसीमा का है। सितंबर 2026 में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में लगभग तीन वर्षों की निर्माण अवधि का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसे निश्चित उद्घाटन तिथि नहीं माना जा सकता। भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य, रेलवे की तकनीकी स्वीकृतियां और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही संचालन की वास्तविक समयसीमा स्पष्ट होगी। केंद्र सरकार की जून 2026 की परियोजना प्रगति रिपोर्ट में दादरी लॉजिस्टिक्स हब और बोड़ाकी ट्रांसपोर्ट हब से संबंधित भूमि तथा वित्तीय प्रगति का विवरण दिया गया है।
बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल के विकसित होने से ग्रेटर नोएडा को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना को बल मिलेगा। अब यात्रियों और स्थानीय निवासियों की निगाहें निर्माण कार्य की प्रगति तथा परियोजना के अगले आधिकारिक अपडेट पर टिकी हैं।